विजय रूपाणी दूसरी बार बने मुख्यमंत्री, अब इन चुनौतियों से करें मुकाबला

नई दिल्ली। गुजरात में भाजपा छठी बार सत्ता में पहुंची है। मंगलवार को शपथ लेने के साथ ही विजय रूपाणी दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बन गए। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में हालांकि भाजपा सत्ता हासिल करने में तो सफल रही , लेकिन बीते 22 सालों में ऐसा पहली बार है जब उसकी सीटें सौ के आंकड़े को नहीं छू पाई हैं। इसका अर्थ यही है कि मतदाताओं के बीच भाजपा की लोकप्रियता का स्तर गिरा है। इसके बरअक्स राज्य की राजनीति में कांग्रेस बहुत दिनों बाद सत्ताधारी दल को चुनौती देती दिखाई दे रही है। विश्लेषकों का मानना है कि सरकार बनने के बाद भी भाजपा की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। मुख्यमंत्री बने विजय रूपाणी को अब इन चुनौतियों से मुकाबला करना है-

ग्रामीण क्षेत्र में जनाधार

विजय रूपाणी और नितिन पटेल के सामने सबसे अहम चुनौती राज्य के ग्रामीण इलाकों में पार्टी की स्थिति को मजबूत करने की है। हाल ही में संपन्न चुनाव में भाजपा ने जिस तरह ग्रामीण इलाकों में जनाधार खोया है, उससे केंद्रीय नेतृत्व सकते में है। सन 2019 के आम चुनाव के मद्देनजर एक बार फिर से मुख्यमंत्री बन रहे रूपाणी और उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल को ग्रामीण इलाकों को विकास के गुजरात मॉडल के दायरे में लाना होगा। पार्टी ने इस चुनाव में गुजरात के चार बड़े शहरों में ही सर्वाधिक सीटें जीती हैं।

पटेलों की नाराजगी

विधानसभा चुनाव के नतीजों में पार्टी के महज 99 सीटों पर सिमट जाने की एक बड़ी वजह आरक्षण के मुद्दे पर पटेलों की नाराजगी को माना जा रहा है। जिस तरह हार्दिक पटेल और कांग्रेस ने प्रचार के दौरान पटेल समुदाय को भाजपा से अलग करने की मुहिम छेड़ी है, वह जनाधार खो रही भाजपा के लिए एक खतरे की घंटी की तरह है। सन 2017 में आम चुनाव होने हैं, तब तक पटेल समुदाय की नाराजगी दूर करना भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती है। यही वजह है पार्टी ने रूपाणी के साथ नितिन पटेल को राज्य मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

सन 2019 में आम चुनाव

विधानसभा चुनावों कांग्रेस की बढ़ी हुई सीटों ने भाजपा को किला गंवाने का अहसास करा दिया है, जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य की सभी सीटों पर विजय हासिल कर प्रधानमंत्री बने नरेन्द्र मोदी को मजबूती देने का काम किया था। विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन ने अगले आम चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन के लिए खतरा पैदा कर दिया है। अब देखना यह है कि अगले आम चुनाव में भाजपा पिछले आम चुनाव का प्रदर्शन दोहरा पाती है या नहीं। सन 2014 में हुए आम चुनाव में उसने राज्य की सभी 26 सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार काग्रेस ने जिस तरह जातीय गणित बिगाड़ा है, उसमें लगता नहीं कि भाजपा अपना पूर्व प्रदर्शन दोहरा पाएगी।

असंतोष से निपटने की चुनौती

गुजरात में भाजपा सरकार के बीते चार कार्यकाल में तीन के दौरान नरेन्द्र मोदी खुद राज्य का नेतृत्व कर रहे थे। उस दौरान कांग्रेस लगातार कमजोर विपक्ष की भूमिका में रही, लेकिन जब से विजय रूपाणी मुख्यमंत्री बने हैं, तब से सत्ता के प्रति असंतोष के स्वर सुनाई देने लगे हैं। इस समय जबकि राज्य में कांग्रेस एक मजबूत विपक्ष के रूप में उभरी है, तो उसे मुखर विरोध के बीच अपनी नीतियों को आगे बढ़ाना होगा।

युवा नेता बन सकते हैं परेशानी

राज्य की नई विधानसभा में विपक्ष के खेमें से भाजपा सरकार के लिए एक राहत की बात है। राज्य में विधानसभा में पहुंचने वाले अधिकांश कांग्रेसी विधायक नए हैं। इन पर भारी पड़ने के लिए भाजपा को अपने तजुर्बे का सहारा लेना होगा। विधानसभा में कांग्रेस के पास अधिकांश ऐसे विधायक हैं जो पहली बार चुनाव जीतकर सदन में पहुंचे हैं। विधानसभा में भाजपा के वरिष्ठ और ज्यादा तजुर्बेकार नेताओं को कांग्रेस के इन युवा चेहरों को साधते हुए पीछे छोड़ने का काम करना होगा। यदि भाजपा की नई सरकार ऐसा नहीं कर पाई तो सन 2019 में होने वाले आम चुनाव उसके लिए भारी परेशानी ले कर आने वाले हैं। अल्पेश-जिग्नेश जैसे कई युवा नेता सदन में पहुंचे हैं, जो राज्य का जातीय गणित और बिगाड़ सकते हैं।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper