विद्यार्थी देवो भवः , लेकिन रोजगार की कोई गारंटी नहीं

अखिलेश अखिल

नेता लोग जब कोई बयान देते हैं तो उसका कुछ मकसद होता है।बिना मकसद और लोभ के नेता बोलते नहीं और खासकर पीएम मोदी तो और भी नहीं। चुकी बीजेपी का मकसद पुरे भारत में बीजेपी को पहुंचाने का है इसलिए उनका हर बयान राजनीति से ही प्रेरित होता है। अब चुकी बीजेपी ने भारत को कांग्रेस मुक्त कर दिया है इसलिए पीएम मोदी का अगला टारगेट आगामी लोक सभा चुनाव में फिर से भारी बहुमत पाने का है। इसी मकसद से अभी हाल में ही पीएम मोदी ने देश के उन लाखों छात्रों को सम्बोधित किया जो अभी दसवीं -बारहवीं का परीक्षा दे रहे हैं। पीएम मोदी को पता है कि ये छात्र अब 18 साल के हो गए हैं और आगामी चुनाव में इनकी भूमिका बढ़ेगी ,इसीलिए पहले से ही पीएम मोदी इन्हें निशाने पर रखे हुए हैं।

राजनीति देखिये कि देश भर के युवक कर्मचारी चयन आयोग परीक्षा में धांधली को लेकर पिछले एक सप्ताह से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। भ्रष्टाचार के विरोध में आवाज उठा रहे हैं लेकिन पीएम मोदी उन युवाओं की समस्या पर एक शब्द भी नहीं बोल रहे। लेकिन जो विद्यार्थी परीक्षा देने जा रहे हैं उन्हें विद्यार्थी देवो भवः कह कर पुचकार रहे हैं। आपको बता दें कि रविवार को कर्नाटक के तुमकुरु में वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिये पीएम ने युवाओं को संबोधित किया। पीएम ने ‘यूथ पावर: ए विजन फॉर न्यू इंडिया’ के विषय पर अपना विचार रखा। पीएम ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि “विद्यार्थी देवो भव”

यह विडंबना ही तो है कि देश के युवा रोजगार और परीक्षा में हो रही धांधली को लेकर सड़कों पर संघर्ष कर रहें है और देश के प्रधानमंत्री उन्हें संस्कृत के मंत्र से संतुष्ट करना चाहते हैं। क्या युवाशक्ति देवो भवः के मंत्र जाप से युवाओं को नौकरी मिल जाएगी? क्या इस मंत्र के जाप करने से परीक्षा में हो रही धांधली रूक जाएगी? क्या इस मंत्र के जाप करने से विश्वविद्यालयों में कम हो रही सीटें बढ़ जाएंगी? अच्छा होता पीएम मंत्र की जगह युवाओं को रोजगार दे देते। पीएम ने हर साल दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था, आज तक कितना दिया है किसी को नहीं पता। उल्टा पकौड़ा बेचने का काम अलग से थमा दिया। पीएम मोदी युवाओं से स्लोगन में ही स्वर्ग ढूंढने को कह रहे हैं।

पीएम ने अपने संबोधन में आगे कहा कि केंद्र सरकार एक और बहुत ही बड़े मिशन पर काम कर रही है और वो है देश में 20 वर्ल्ड क्लास शिक्षा संस्थान बनाने का काम। पीएम का वादा किसी पुराने जुमलों जैसा ही है। पीएम के वादे पर युवा क्यों भरोसा करे? क्या पीएम ने अपना कोई एक भी वादा पूरा किया है जिसके आधार पर उनके नए वादों पर भरोसा किया जा सके? पीएम ने 100 स्मार्ट सिटी बनाने का वादा किया था, पांच में से चार साल का कार्यकाल खत्म हो चुका है लेकिन एक भी स्मार्ट सिटी नहीं बनी।

भारत को स्वच्छ बनाने का वादा किया था, आज तक कितना भारत स्वच्छ हो चुका है इसका कोई हिसाब नहीं है। विदेशों से कालाधन लाने का वादा किया था, अब फेयर एण्ड लवली स्कीम के तहत कुछ प्रतिशत टैक्स लगाकर काले को सफेद किया जा रहा है। गंगा साफ करने का वादा किया था, क्या पीएम आज ये कह सकते हैं कि उन्होंने गंगा साफ कर दिया?

हर साल युवाओं को दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वाद किया था, कहां गया वो रोजगार? जब पीएम ने अपने इतने सारे वादों को पूरा नहीं किया तो ये कैसे मान लिया जाए कि वो 20 वर्ल्ड क्लास शिक्षा संस्थान बना देंगे? अगर ये संस्थान बन भी जाए तो क्या होगा ? क्या कोई रोजगार की गारंटी है या उन महान संस्थानों से पढ़ने के बाद ही पकौड़े ही बेचने होंगे ?

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