विधान सभा में उठा शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत दाखिला न लेने वाले वि़द्यालयों का मामला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधान सभा में क्रांगेस विधायक दल के नेता अजय कुमार लल्लू ने मंगलवार को शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(1)(ग) के तहत हो सकने वाले 6 लाख से ऊपर दाखिलों की तुलना में शैक्षणिक सत्र 2015-16 में मात्र 3,135, 2016-17 में 17,136 व 2017-18 में 27,662 ही हुए दाखिलों पर सवाल उठाते हुए यह पूछा कि सरकार सिटी मांटेसरी, नवयुग रडियंस व विरेन्द्र स्वरूप जैसे स्कूलों के खिलाफ क्या कार्यवाही करने की सोच रही है जो अधिनियम के तहत अलाभित समूह व दुर्बल वर्ग के बच्चों को दाखिला देने को तैयार नहीं हैं।

उन्होंने यह भी पूछा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत गैर-वित पोषित विद्यलयों को जो मान्यता देने की प्रकिया शुरू की जानी चाहिए थी वह अभी तक क्यों नहीं हुई? अजय कुमार लल्लू ने यह भी पूछा कि सिटी मांटेसरी स्कूल की इंदिरा नगर शाखा का भवन बिना अनुमति बना, भू-उपयोग आवासीय है, आवास विकास परिषद का 21 वर्ष पुराना ध्वस्तीकरण आदेश है तो यह विद्यालय कैसे चल रहा है? इसे न तो शिक्षा विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त है और न ही जिला प्रशासन ने भूिम प्रमाण पत्र्र दिया है। फिर सवाल उठता है कि काउंसिल फॉर इण्डियन स्कूल सर्टिफिकेट इग्जामिनेशन्स ने इस विद्यालय को मान्यता कैसे दी? इस व सी.एम.एस. की अन्य शाखाओं के खिलाफ सरकार क्या कार्यवाही कर रही है?

आखिर में उन्होंने यह भी पूछा कि जो विद्यालय दाखिला ले रहे हैं उन्हें सरकार की ओर से शुल्क प्रतिपूर्ति में देरी क्यों हो रही है? इससे पहले एक लिखित प्रश्न कि क्या सरकार लखनऊ स्थित सिटी मांटेसरी, नवयुग रेडियंस, सटी इण्टरनेशनल स्कूल एवं कानपुर के विरन्द्र स्वरूप विद्यालय समेत प्रदेश के अन्य निजी विद्यालयों में उक्त अधिनियम का अनुपालन कराएगी शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने जवाब में कहा है जी हां। किंतु सच यह है ऊपर लिखित विद्यालय सरकार को ठेंगा दिखा रहे हैं व सरकार उनके सामने लाचार है।

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