विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की करें खास देखभाल

लखनऊ: कोविड-19 यानि कोरोना काल में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को चुस्त-दुरुस्त बनाये रखने के लिए उनकी दिनचर्या पर खास ध्यान देने की जरूरत है। इसके लिए जरूरी है कि बदली परिस्थितियों में परिवार वाले ऐसे बच्चों की दिनचर्या तय करें और उसी के मुताबिक़ देखरेख करें । ऐसा न करना बच्चे की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है ।

​आयुष चिकित्सक (होम्योपैथिक) डॉ. अवधेश द्विवेदी का कहना है कि कोरोना के चलते लोगों का अधिकतर समय घर पर ही बीत रहा है, ऐसे में हर किसी की दिनचर्या में बदलाव आना स्वाभाविक है , लेकिन इसका असर बच्चे की दिनचर्या पर कतई न पड़ने पाए । परिवार के हर सदस्य को इस पर ध्यान देना बहुत ही जरूरी है कि बच्चे के सोने, जागने और खेलने का समय निर्धारित करें और उसी के मुताबिक़ देखभाल करें । इसके अलावा बदलते मौसम के मुताबिक़ बच्चों को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ और पानी पिलायें ताकि शरीर में पानी की कमी न होने पाए । इसके अलावा बच्चों की बातों को नजरअंदाज करने से बचें, उसकी बातों को ध्यान से सुनें और उसकी समस्या का समाधान भी करें ।

स्क्रीन टाइम कम रखें :
​बच्चों के लिए प्रतिदिन की समय सारणी तय करें और दिनचर्या चक्र को तोड़ने से बचें । इसमें बच्चों के सोने और जागने का समय, खेलने का समय, टीवी देखने का समय आदि के लिए एक बुनियादी दिनचर्या बनाए रखें और ध्यान रहे कि इसमें बच्चे का स्क्रीन टाइम कम से कम रखें । यदि बच्चे को नियमित रूप से कोई दवा दी जा रही है तो दवा का टाइम न बदलें ।

दैनिक जीवन कौशल सिखाएं :
​बच्चों को हाथ धोने, ब्रश करने, कपड़े पहनने आदि जैसी गतिविधियों से जोड़ें । यह जरूर सुनिश्चित करें कि बच्चा हमेशा अपने को सुरक्षित महसूस करे और चिंतित न रहे । उन गतिविधियों पर ज्यादा जोर दें जिससे बच्चा परिचित हो और उसे आसानी से कर सके । शारीरिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय तय करें । इसमें मोटर गतिविधियों, खेल गतिविधियों और घर में खेले जाने वाले आसान गेम को शामिल करें ।

परिवार के सदस्य भी गतिविधियों में बच्चे का साथ दें :
​बच्चे को लूडो-स्नेक लैडर, गेंद को पास करने आदि जैसे खेलों के साथ-साथ टेबल की सफाई, पौधों को पानी देने जैसी गतिविधियों में शामिल करें । पढने, गणित और मोटर कौशल आदि को बढ़ावा देने के लिए क्राफ्ट मेकिंग जैसी कला की गतिविधियाँ बच्चों को सिखाएं । बच्चे की देखभाल करने वाले माता-पिता या परिवार के सदस्यों को भी बच्चे के साथ गतिविधियों में शामिल होना चाहिए ।

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