शनि करेंगे कल्याण

शनि ग्रह की ज्योतिष शास्त्र में अहम भूमिका है। शनि मंद गति से चलने वाला ग्रह है और एक राशि में दो वर्ष छह मास तक विराजमान रहता है। यही वजह है कि शनि ग्रह एक साथ आठ राशियों को प्रभावित करता है। तीन राशियों को अपनी दृष्टि से, तीन को साढ़ेसाती के रूप में और दो राशियों को ढैया से प्रभावित करता है। इसीलिए शनि को न्यायाधीश का दर्जा हासिल है।

शनि ग्रह 30 साल बाद 24 जनवरी, 2020 को अपनी स्वयं की राशि मकर में प्रवेश कर गए हैं। इसके चलते 24 जनवरी को जहां वृषभ और कन्या राशि पर शनि की ढैया खत्म होगी, वहीं मिथुन व तुला पर ढैया शुरू होगी। इसी प्रकार शनि की साढ़ेसाती वृश्चिक राशि पर समाप्त होगी और कुंभ राशि को साढ़ेसाती लगेगी। धनु और मकर राशि पहले से ही साढ़ेसाती से प्रभावित हैं। दरअसल, जन्म-कुंडली में शनि के शुभ होने पर व्यक्ति सुखी और अशुभ होने पर दुखी व चिंतित रहता है। शुभ शनि अपनी साढ़ेसाती और ढैया में जातक को लाभ प्रदान करता है, जबकि अशुभ शनि इस समयावधि में घोर कष्ट भी देता है।

शनिदेव न्यायाधीश के रूप में व्यक्ति के कर्मों के अनुसार उसे दंडित या गौरवान्वित करते हैं। इसलिए आप नीयत साफ रखें, छल-कपट और चालाकी से दूर रहें। मांसाहार-शराब छोड़ दें। बेसहारा, अपाहिज, असहाय व्यक्तियों की मदद करें। छोटे कर्मचारियों का सहयोग करते रहें। किसी के साथ भी कटु वाणी का प्रयोग न करें। यदि आपने यह आचरण अपना लिया, तो शनिदेव निश्चित ही प्रसन्न होकर आपको सुख-समृद्धि प्रदान करेंगे।

काली गाय के सिर पर रोली लगाकर सींगों में कलावा बांधकर धूप-आरती करें, फिर परिक्रमा करके गाय को बूंदी के चार लड्डू खिलाएं।
सूर्यास्त के बाद हनुमानजी को सिंदूर लगाएं और काली तिल्ली के तेल का दीपक जलाएं।
भैरवजी की उपासना करें और शाम के समय काले तिल के तेल का दीपक लगाकर शनि दोष से मुक्ति के लिए प्रार्थना करें।
यदि आप पर शनि की साढ़ेसाती, ढैया या महादशा चल रही हो, तो इस दौरान शराब, मांस का सेवन न करें।
शाम के समय बरगद और पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
सुबह स्नान के बाद सवा किलो कोयला, एक कील काले कपड़े में बांधकर अपने सिर पर से घुमाकर बहते हुए जल में प्रवाहित करें।
शनि जयंती से एक रात पहले काले चने पानी में भिगो दें। शनि जयंती के दिन चने, कच्चा कोयला, हल्की लोहे की पत्ती काले कपड़े में बांधकर मछलियों के तालाब में डाल दें।
शनिवार को बंदरों और काले कुत्तों को बूंदी के लड्डू खिलाने से कुप्रभाव कम होता है।
काले घोड़े की नाल या नाव में लगी कील से बना छल्ला धारण करें।
शनि यंत्र की स्थापना करें। इसके बाद प्रतिदिन इस यंत्र की विधि-विधान से पूजा करते हुए सरसों के तेल का दीप जलाएं।

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