शनि जयंती, सोमवती अमावस्या के साथ वट सावित्री व्रत आज

लखनऊ: ज्येष्ठ माह की अमावस्या सोमवार को शनि जयन्ती के साथ वट सावित्री भी मनाया जाएगा। इसके अलावा सोमवती अमावस्या भी पड़ रही है। इसके चलते पीपल की वृक्ष का पूजा विशेष महत्व रहेगा। स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र के ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि बरगद और पीपल की पूजा से शनि, मंगल, राहू के अशुभ प्रभाव दूर होंगे। इस दिन व्रत रखकर सायंकाल में शनि पूजन और शनि की वस्तुओं के दान और शनि के मंत्र जैसे ‘‘ऊँ शं शनैश्चराय नम:। इसका जाप शनि की कृपा दिलाएगा।

शनि के दस कल्याणकारी नामों का निरंतर जप भी कल्याणकारी है। शनि पश्चिम दिशा का स्वामी और इसे ज्योतिष में न्यायधीश और सूर्य पुत्र कहा गया है। वर्तमान में शनि की साढ़े साती मकर, धनु , वृश्चिक राशि पर चल रही है और शनि की ढैया वृषभ और कन्या राशि में चल रही है या जिन व्यक्तियों की कुडंली में शनि अशुभ स्थिति में हो या पीड़ित हो,तो उन्हें शनि को प्रसन्न करने के लिये पीपल के वृक्ष की पूजा, दीन-दु:खियों, गरीबों और मजदूरों की सेवा और सहायता, काली गाय, काला कुत्ता, कौवे की सेवा करने से, सरसों का तेल, कच्चा कोयला, लोहे के बर्तन, काला वस्त्र, काला छाता, काले तिल, काली उड़द आदि के दान करने से शनि शुभफल देते है।

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