शरद पवार ने किया रात्रिभोज का इंतजाम, विपक्षी नेताओं के साथ करेंगे भविष्य की राजनीति पर चर्चा

अखिलेश अखिल

शरद पवार की राजनीति कौन नहीं जानता! वे पवार है और पावर भी। महाराष्ट्र की राजनीति के वे बादशाह माने जाते हैं। केंद्र सरकार में भी उनकी ठसक कोईकम नहीं रहती जब उनकी पार्टी सत्तासीन दलों के साथ गठजोड़ में रहती है। एक समय था जब महाराष्ट्र में वे कांग्रेस के बड़े क्षत्रप हुआ करते थे। मुख्यमंत्री भी बने और केंद्र में मंत्री भी रहे। कांग्रेस से जुदा हुए तो अपनी पार्टी बनायी एनसीपी। महारष्ट्र में एनसीपी आज भी बेहद मजबूत है। पवार अब बूढ़े हो गए हैं लेकिन उनकी राजनीती अभी बूढी नहीं हुयी है। उनकी नजर आज भी सत्ता शीर्ष पर टिकी है। उनके मन में भी पीएम बनने की ख्वाईश है। और रहे भी क्यों नहीं ?

आज मंगलवार को पवार ने रात्रि भोज का इंतजाम किया है। विपक्षी दलों को इस भोज में आना है और भविष्य की राजनीति पर चर्चा होनी है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली पहुँच चुकी है। इस भोज में सारे विपक्षी दल जमेंगे और बीजेपी की राजनीति से देश को कैसे निजात मिले, इस पर चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक के नेता इस भोज में शिरकत करने आ रहे हैं। सत्ता पक्ष की खास नजर इस महाभोज पर टिकी है।

इस भोज के बाद पवार के पावर का इम्तेहान होगा। विपक्ष की राजनीति किस तरफ जायेगी और किसके नेतृत्व में खेल खेला जाएगा इस पर मंथन होगा। कुछ लोग कह रहे हैं कि विपक्षी एकता बनना कठिन है। इसकी वजहें भी वे बताते हैं। सोनिया गाँधी ने पहले ही डिनर पर सबको बुलाया था। एकता की बात की थी। फिर अब पवार सबको डिनर पर बुला रहे हैं। उधर अप्रैल में भी दक्षिण राज्य तेलंगाना में एक कार्यक्रम होना है। ऐसे में विपक्ष का नेतृत्व किसके हाथ हो यह बड़ा सवाल खड़ा है और यही सवाल बीजेपी को ताकत दे रहा है।

भाजपा को रोकने की बात तो सब कर रहे हैं लेकिन सबकी शर्ते भी अपनी अपनी है। ममता बनर्जी की चाहत भी पीएम की कुर्सी तक पहुँचने की है। उनका अपना जनाधार है और अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि भी। जन नेता के रूप में पहचान भी। उधर पवार की राजनीति भी कुछ कम नहीं। राजनीतिक दलों के बीच उनकी अपनी अलग पहचान है और उनका गुणा भाग और नेताओं से कुछ ज्यादा ही तेज है। उधर तेलंगना वाले के चंद्रशेखर राव की अपनी डफली है। एक चेहरा वे भी उभरते आ रहे हैं। उन्ही के साथ एक चेहरा टीडीपी नेता और आंध्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का भी है। उनकी भी एक अलग राजनीतिक ठसक है। पहचान में किसी से कम नहीं और और दलों के बीच भी सम्बन्ध।

कांग्रेस की राजनीति तो जग जाहिर है। सोनिया गांधी पार्टी अध्यक्ष पद से हटकर अपनी जिम्मेदारी पुत्र राहुल गाँधी को सौप चुकी है। लेकिन सोनिया के प्रति तमाम विपक्षी दलों में इज्जत भी है। ऐसे में तीसरा मोर्चा या यूपीए या फिर फेडरल मोर्चा कैसे तय होगा कहना मुश्किल है। सोनिया की समझ कुछ रही है जो चाहती है कि राहुल के नेतृत्व में मोर्चा बने और बीजेपी को हराया हराया जाय। उधर अभी ममता को राहुल के कद काठी से परहेज है लेकिन सोनिया के प्रति आदर। के चंद्रशेखर राव गैर बीजेपी गैर कांग्रेस का नारा जप रहे हैं जबकि इन सबके बीच पवार की राजनीति अभी चुप्पी मारे सब परख रही है। पवार के इस डिनर पार्टी में निश्चित रूप से कुछ ऐलान होना है। ममता ,पवार और राव के साथ कांग्रेस की दोस्ती कितनी बन पाती है इसे समझने की जरूरत होगी।

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