शरद पूर्णिमा की रात करें भगवान शिव को प्रसन्न और पाएं ये विशेष वरदान

लखनऊ: शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) को कोजागर पूर्णिमा, रास पूर्णिमा, कौमुदी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। आश्विन माह के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। हिंदू धर्म में इसका खास महत्व बताया गया है। कहते हैं इस दिन चंद्रमा की किरणों में अमृत भर जाता है और ये किरणें हमारे लिए बहुत लाभदायक होती हैं।

माना जाता है कि इस रात को चांद से अमृत बरसता है। शरद पूर्णिमा की रात को 5 देवी-देवताओं की पूजा कर उन्हें प्रसन्न करने का विधान है। भगवान शिव, माता लक्ष्मी, देवता कुबेर, श्री कृष्ण और चंद्र देव। भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान है। इसलिए चंद्रमा को प्रसन्न करने का आसान तरीका है भगवान शिव की आराधना करना।

इस दिन भगवान शिव का शहद से अभिषेक करने से आपको तीन विशेष वरदान मिलेंगे। शिव आपको मृत्यु भय से मुक्त करेंगे, गरीबी दूर करेंगे और काम में होने वाली हानि से आपकी रक्षा करेंगे। इस रात चन्द्रमा धरती के सबसे नजदीक आता है और माना जाता है इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है। इसलिए खीर बना कर रात को छत पे रख दिया जाता है और सुबह इस अमृत रूपी खीर को प्रसाद के रूप में खाया जाता है।

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