शहडोल जिले में 10 माह में 900 नवजात शिशुओं और 55 प्रसूताओं की मौत

शहडोल: मप्र के शहडोल जिले मैं स्वास्थ्य सेवाएं बद से बदतर हो गई है। यह मप्र का सघन आदिवासी जिला है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2017 से लेकर फरवरी 2018 तक 900 से ज्यादा नवजात और 5 वर्ष तक के शिशुओं की मौत हो चुकी है। इसी अवधि में 55 प्रसूताओं की भी मौत हो गई।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिन प्रसूताओं की मौत हुई है। उनमें से अधिकांश खून की कमी अर्थात एनिमिक होने के कारण हुई है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में पिछले 10 माह में 25000 गर्भवती महिलाओं में 21000 महिलाओं को चिन्हित किया गया, जो एनीमिया की शिकार थी। रिपोर्ट में सबसे ज्यादा शिशुओं की मौत जिला अस्पताल में इलाज के दौरान हुई है।

आदिवासी जिले में इतने बड़े पैमाने पर शिशुओं की मौत होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने कोई ऐसे प्रयास नहीं किए। जिससे ऐसा लगे कि शासन आदिवासियों के हितों की तरफ ध्यान दे रहा है। स्वास्थ्य विभाग इतनी सारी मौतें होने के बाद भी कुंभकर्णी नींद में सोता हुआ नजर आ रहा है।

इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी बड़ी मासूमियत से यह कहकर पीछा छुड़ा लेते हैं। मामला बेहद गंभीर है। मैदानी अमले को भेजा गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव जाकर जांच कर रही है। उसके बाद भी मौतों का आंकड़ा घटने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है।

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