शिवपाल के निशाने पर अब भाजपा नहीं, अखिलेश

अखिलेश अखिल

कहते हैं, राजनीति जो ना करा दे, वह कम है। पिता सामान चाचा शिवपाल, जो कल तक भाजपा के विरोध में झंडा लहरा रहे थे, अब भतीजे के खिलाफ तांडव मचा रहे हैं। लोग कहते हैं कि यह शिवपाल का तांडव है, जो अपने साथ सबको भस्म करेंगे। सपा की बर्बादी होगी और अखिलेश की राजनीति जब गर्त में मिलेगी तब शिवपाल का गुस्सा शांत होगा। दरअसल, वोटकटवा पार्टी का इल्जाम शिवपाल की पार्टी पर लगा, तो वह क्षुब्ध हो गए। शिवपाल ने प्रण किया कि अब चाहे जो हो, सपा की राजनीति को जमींदोज करके ही मानेंगे। लंका का नाश कैसे हुआ? रावण को भला कौन मार सकता था? किसे पता था कि रावण की नाभि में प्राण हैं? विभीषण को रावण ने दुत्कारा, ललकारा, सताया और बेइज्जत किया, तो विभीषण भाई के शत्रु हो गए। रावण के सारे राज भगवान राम को बताए और रावण का नाश हो गया। सोने की लंका भी खाक हो गई।

यूपी की राजनीति में शिवपाल की राजनीति रंग ला रही है। उधर मुलायम सिंह की हालत उस धृतराष्ट्र सरीखी हो गई है, जो सबका कल्याण चाहते हुए भी पुत्र मोह में फंसे रहे और ‘महाभारत’ हो गई। कोई नहीं बचा, सब मारे गए। मुलायम को पुत्र अखिलेश से भी मोह है और भाई शिवपाल से भी। न वह भाई को छोड़ कर जगहंसाई के पात्र बनाना चाहते हैं और न ही पुत्र को छोड़ पिता-पुत्र के संबंधों को खराब करना चाहते हैं। वह क्या चाहते हैं किसी को पता नहीं, लेकिन इतना जरूर पता है कि बातें बहुत आगे जा चुकी हैं। चाचा-भतीजा दो ध्रुव पर जा चुके हैं, जिन्हें मिलाना अब कठिन है। ऐसे में सूबे की राजनीति करवट लेगी। विरोधी लाभ लेंगे और अपने जमींदोज होंगे। राजनीति का यह खेल सबको भ्रमित किए है। राजनीतिक विश्लेषक भी चाचा-भतीजा के इस खेल को नहीं समझ पा रहे हैं।

जिस तरह के नाजरे सामने आ रहे हैं उससे साफ दिख रहा है कि बहुत कम समय में शिवपाल की राजनीति रंग लाती दिख रही है। हालिया फिरोजाबाद की रैली बहुत कुछ कह रही है। सपा से टूटे हजारों लोगों की भीड़ जिस तरह से फिरोजाबाद में शिवपाल को सलाम कर रही है, उससे साफ है कि शिवपाल की राजनीतिक ताकत को नाकारा नहीं जा सकता। सपा कमजोर होगी और अगले चुनाव में नई राजनीति सूबे में दिखेगी, इससे भी अब इनकार नहीं किया जा सकता। शिवपाल की राजनीति चाहे जिसके साथ गठबंधन करे, सपा लाचार ही होगी और कमजोर भी। फिरोजाबाद अखिलेश की पत्नी डिम्पल यादव का क्षेत्र रहा है। कई लोग मान रहे हैं कि यहां से शिवपाल खुद चुनाव लड़ेंगे। यानी अपनी बहू को चुनौती देंगे। अगर ऐसा हुआ तो मुलायम परिवार का यह खेल इतिहास भी बनेगा और रोमांचक भी होगा।

समाजवादी पार्टी से अलग होने तथा अपनी नई पार्टी बनाने के बाद से ही शिवपाल यादव और उनकी पार्टी यूपी में चर्चा का विषय बनी हुई है। एक तरफ जहां रोड शो के दौरान शिवपाल ने शक्ति प्रदर्शन किया। वहीं योगी सरकार व मुलायम परिवार के सदस्य भी शिवपाल पर मेहरबान नजर आ रहे हैं। शिवपाल यादव का रोड शो फिरोजाबाद जिले की सीमा कठफोरी से शुरू होकर टूंडला तक गया। इस बीच समर्थकों की भीड़ देखते ही बन रही थी। रोड शो से साफ हो गया कि शिवपाल को हल्के में आंकना किसी भी पार्टी के लिए नुकसानदेय हो सकता है।

इसके अलावा शिवपाल और उनकी पार्टी को लेकर मुलायम परिवार की फूट खुलकर सामने आ गई है। छोटी बहू अपर्णा यादव के तेवरों ने बता दिया कि वह अपने ससुर और जेठ के साथ नहीं, बल्कि अपने पति के चाचा यानी शिवपाल के साथ खड़ी हैं। गौरतलब है कि मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव शनिवार को राष्ट्रीय क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी के स्थापना दिवस के कार्यक्रम में चाचा शिवपाल के साथ मंच साझा किया और शिवपाल की पार्टी समाजवादी सेक्युलर मोर्चा को मजबूत बनाने का आह्वान किया, जिसके बाद यूपी की सियासत में अचानक से सरगर्मी बढ़ गई।

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