शिवराज की बदनाम सरकार अब बाबा के भरोसे

अखिलेश अखिल

क्या मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार जनता का विश्वास खो रही है ? क्या सूबे की जनता का अब शिवराज सरकार से मोह भांग हो गया है और क्या शिवराज की राजनीतिक जमीन पहले जैसी नहीं रही? ये कुछ ऐसे सवाल है जो मध्य प्रदेश की जनता को परेशान किये हुए हैं। इसी साल के अंत में सूबे में चुनाव होने हैं और सच यही है कि पिछले 15 साल से सत्ता में जमीं शिवराज सरकार जनता को वह सब आजतक नहीं दे पायी जिसकी घोषणा वे हर चुनाव में करते रहे हैं। अब जब एकाएक शिवराज सिंह ने सूबे के पांच बाबाओं को राज्य मंत्री का दर्जा दिया विपक्ष के हाथ में कहने को बहुत कुछ मिल गया।

मुख्यमंत्री के इस बाबा प्रेम को देख कर प्रदेश के लोग भी हतप्रभ हैं। भोपाल के एक समाजवादी नेता कहते हैं कि ”अब शिवराज का समय जाता रहा, आखिर कितने दिनों तक जनता को उल्लू बनाएंगे। जब कुछ लूट गया तो शिवराज सिंह को बाबा याद आ गए। यह सब जनता को ठगने जैसा ही है। सूबे की जनता बेकार है ,नौजवान को नौकरी नहीं और महिला अत्याचार सबसे ज्यादा। पता नहीं जनता वोट क्यों देती है ” बाबा को राज्यमंत्री का दर्जा देना अब शिवराज सिंह को कही भारी ना पड़ जाय। विपक्ष पूरी तरह से शिवराज के इस फैसले पर तल्ख़ है।

जिन पांच बाबाओं को शिवराज ने राज्यमंत्री का दर्जा दिया है उनमें से 2 बाबा तो कल तक उनकी ही सरकार पर नर्मदा घोटाला का आरोप लगा यात्रा निकाल रहे थे। ये दो बाबा शिवराज सिंह के घोर विरोधी थे, अक्सर पूरी सरकार को घेरने से बाज नहीं आते थे। लेकिन अब सत्ता का सुख उन्हें दे दिया गया है। कुछ लोग कह रहे हैं कि आगामी चुनाव को देखकर शिवराज सिंह बाबा के जरिये ही चुनाव जितना चाहते है क्यों इन बाबाओं की जनता में खास पकड़ है। लेकिन इसके अलावा भी कुछ और बात है। इस बात की भी चर्चाएं हैं कि अपनी नर्मदा यात्रा समाप्त करने के करीब पहुंच चुके दिग्विजय सिंह को इसका राजनीतिक फायदा उठाने से से पहले शिवराज ने सधी हुई चाल चल दी है।

आपको बता दें कि मंगलवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदानंद महाराज, हरिहरनंद महाराज, कंप्यूटर बाबा, भय्यू महाराज और पंडित योगेंद्र महंत को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया। रोचक बात यह है कि इस फैसले से ठीक पहले संत समाज की एक बैठक में शिवराज सरकार पर नर्मदा घोटाले का आरोप लगाया गया था। 45 जिलों के साधु-संत समाज ने 45 दिन की नर्मदा घोटाला रथ यात्रा निकालने का ऐलान किया था। यह रथयात्रा एक अप्रैल से शुरू हो गई थी और इसे 15 मई तक चलना था।

इस यात्रा का नेतृत्व कंप्यूटर बाबा कर रहे थे और इसके संयोजक पंडित योगेंद्र महंत थे। इन दोनों का ही नाम उन पांच बाबाओं में है जिन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिला है। साधु-संत समाज ने शिवराज सरकार पर आरोप लगाए थे कि नर्मदा के किनारे 6 करोड़ पौधे लगाने का दावा किया गया है जिसका नामोनिशान नहीं है। इसके अलावा अवैध उत्खनन किया जा रहा है। अब मंत्री बनते ही इन बाबाओं के सुर बदलते नजर आ रहे हैं। कंप्यूटर बाबा का कहना है कि शिवराज सरकार ने उनकी मांगें मान ली हैं। नर्मदा पर एक समिति बना दी है और हमें उसका सदस्य बना राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया है।

उधर ,बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा देने के सवाल पर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है। चुनावी माहौल में शिवराज भले खामोश हों लेकिन स्थानीय मीडिया इस मामले को दिग्विजय सिंह से भी जोड़ कर देख रही है। दिग्विजय सिंह अपनी पत्नी अमृता राय के साथ नर्मदा परिक्रमा पर निकले हैं। उनकी यह परिक्रमा यात्रा 9 अप्रैल को समाप्त होने जा रही है। ऐसा माना जा रहा है कि यात्रा समाप्त कर दिग्विजय सिंह नर्मदा किनारे पौधारोपण, अवैध खनन, सफाई जैसे मुद्दों में कथित तौर पर घोटाले का मामला उठा शिवराज सरकार पर हमलावर हो सकते हैं। लेकिन बीजेपी के ही एक विधायक यह भी कहते हैं कि हमें कांग्रेस की राजनीति का कोई डर नहीं। डर जनता का है। इस बार थोडी परेशानी जरूर दिख रही है लेकिन बाबा की राजनीति कुछ समझ में नहीं आती। मुख्यमंत्री का यह दाव कहाँ जाकर बैठेगा कहना मुश्किल है।

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