शोध में हुआ खुलासा, योग से गर्भवती महिलाओं की कम होती है प्रसव पीड़ा ’

लॉस एंजिल्स: गर्भवती महिलाओं और उनके शिशु पर योग के प्रभावों को लेकर किए गए एक शोध में कहा गया है कि नियमित योग करने वाली गर्भवती महिलाओं को नींद बेहतर आती है और प्रसव पीड़ा कम होती है।साथ ही इससे गर्भवती महिलाओं की ह्रदय गति अपेक्षाकृत ज़्यादा रहने से उनमें तनाव कम देखा गया है।

यह शोध रिपोर्ट यहां गुरुवार को स्त्री रोग विषयों की एक अन्तर्राष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशित हुई है। जापान की ओसाका यूनिवर्सिटी में डाॅक्टर शिमादा और डाक्टर हाएसी ने अपने शोध के लिए औसत 33वर्ष की गर्भवती महिलाओं के दो समूह बनाए थे। एक समूह में योग के लिए 38 महिलाओं को लिया गया तो दूसरे समूह में योग नियंत्रित 53 गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि योग अभ्यास से गर्भवती महिलाओं ने योग नहीं करने वाली गर्भवती महिलाओं की तुलना में ज़्यादा आराम महसूस किया। योग का ‘नर्वस सिस्टम’ पर भी अनुकूल असर पड़ने का दावा किया गया है। इस सिस्टम को दो भागों में अर्थात सहानुभूतिपूर्ण तथा अतिरिक्त सहानुभूतिपूर्ण में विभक्त किया गया हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जो महिलाएं योग नहीं करती हैं, उनमें उत्तेजना बढ़ती है और हर मुश्किल से लड़ने की क्षमता का भी संचार होता है। इसके विपरीत अतिरिक्त ‘सहानुभूतिपूर्ण’ अर्थात नियमित योग करने वाली गर्भवती महिलाएं ज़्यादा क्रियाशील होती है, उनमें प्रसव पीड़ा कम होती है तथा वे प्रसव के समय ज़्यादा आराम महसूस करती है। लेकिन प्रसव के समय खून के क्षय में कोई अंतर नहीं पड़ता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि गर्भवती महिलाओं में हाइपर टेंशन कम करने और शिशु में ख़ून का संचालन बाख़ूबी होता रहे, इसके लिए ज़रूरी है की नियमित योग किया जाए। एक महिला को योग का लंबे समय तक लाभ कैसे मिले, इस बारे में रिपोर्ट में कोई जानकारी नहीं दी गई है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper