श्राप से मुक्त हुआ मैसूर का वाडियार राजवंश, 400 साल बाद महल में गूंजी किलकारी

नई दिल्ली: मैसूर के वाडियार राजवंश को 400 साल पुराने एक कथित ‘शाप’ से मुक्ति मिल गई है। बुधवार रात करीब 9:30 बजे शाही परिवार के उत्तराधिकारी यदुवीर श्रीकंठ दत्ता चामराजा की पत्नी त्रिशिका ने एक बेटे को जन्म दिया है। इस राजवंश पर कथित रूप से शाप था कि राजगद्दी के उत्तराधिकारी या राजा के घर कभी बेटे का जन्म नहीं होगा। यदुवीर और त्रिशिका की शादी पिछले साल जून में हुई थी। त्रिशिका डुंगरपुर की राजकुमारी हैं। वहीं यदुवीर मैसूर के दिवंगत महाराज श्रीकांतदत्त नरसिम्हराज वाडियार और रानी प्रमोदा देवी के दत्तक पुत्र हैं।

आपको बता दें कर्नाटक के मैसूर राजवंश में पिछले 400 सालों से कोई बेटा पैदा नहीं हुआ है और इसका कारण बताया जाता है एक रानी का इस राजवंश को दिया गया श्राप। कहा जाता है कि 1612 में दक्षिण में सबसे शक्तिशाली माने जाने वाले विजयनगर साम्राज्य के पतन के बाद वाडियार राजा के आदेश पर यहां की धनसंपत्ति लूट ली गई। हार के बाद विजयनगर की तात्कालीन रानी अलमेलम्मा एकांतवास में थीं, लेकिन उनके पास काफी हीरे-जवाहरात और गहने थे।

वाडियार ने महारानी के पास दूत भेजकर उन्हें गहने सौंप देने के लिए कहा क्योंकि वे गहने और हीरे-जवाहरात अब वाडियार की शाही संपत्ति का हिस्सा बन चुके थे। लेकिन महारानी ने गहने देने से इनकार कर दिया जिसके बाद वाडियार की सेना खजाने पर जबरदस्ती कब्जा करने की कोशिश करने लगी।

ऐसा बताया जाता है कि इससे आहत रानी अलमेलम्मा ने वाडियार राजा को शाप दिया कि जिस तरह उनका घर उजाड़ा गया है उसी तरह उनका देश वीरान हो जाएगा। उन्होंने शाप दिया कि इस वंश के राजा की गोद हमेशा सूनी रहेगी। इसके बाद महारानी ने कावेरी नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली। तब से अब तक इस राजघराने में किसी राजा के दत्तक पुत्र को ही राजगद्दी मिलती रही है। यह इतने सालों में पहली बार है कि राजगद्दी के उत्तराधिकारी के घर बेटा पैदा हुआ है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper