संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का सदस्य बना पाकिस्तान, कई मानवाधिकार संगठनों ने किया विरोध

नई दिल्लीः आतंकवाद का गढ़ माने जाने वाला पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का सदस्य चुन लिया गया है। पाकिस्तान के परिषद का हिस्सा चुने जाने के खिलाफ कई मानवाधिकार संगठनों ने विरोध दर्ज कराया है।

दरअसल पाकिस्तान अब संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में एशिया प्रशांत क्षेत्र की अगुवाई करेगा। संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च मानवाधिकार निकाय के लिए हुई वोटिंग में एशिया प्रशांत क्षेत्र की चार सीटों पर पांच उम्मदवारों में से पाकिस्तान को सर्वाधिक मत मिले हैं।

संयक्त राष्ट्र महासभा में आयोजित इस गुप्त मतदान प्रक्रिया में एशिया प्रशांत क्षेत्र से पाकिस्तान को 169 वोट प्राप्त हुए हैं। वहीं उज्बेकिस्तान को 164 वोट, नेपाल को 150 और चीन को 139 वोटों के साथ चुना गया है। इसके अलावा सऊदी अरब को महज 90 वोटों के साथ इस मतदान प्रक्रिया में हार का सामना करना पड़ा।

वहीं इस वोटिंग से पहले ही यूरोप, अमेरिका एवं कनाडा आधारित विभिन्न मानवाधिकार समूहों ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों से चीन, रूस, सऊदी अरब, क्यूबा, पाकिस्तान एवं उज्बेकिस्तान के निर्वाचन का विरोध करने का आह्वान करते हुए कहा था कि, इन देशों का मानवाधिकार रिकॉर्ड बेहद खराब है, इसलिए इन्हें मानवाधिकार परिषद की अगुवाई करने का दारोमदार नहीं सौपना चाहिए। वहीं रूस और क्यूबा पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं।

गौरतलब है कि पाकिस्तान जनवरी 2018 से ही संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का सदस्य है। परिषद में अपना तीन साल कार्यकाल पूरा करने के पूर्व ही पाकिस्तान को फिर से दूसरे कार्यकाल के लिए बतौर सदस्य चुन लिया गया है। पाकिस्तान का यह कार्यकाल जनवरी 2021 से शुरू होगा।

 

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