संयोग देखिए! निर्भया के गांव से 13 किलोमीटर की दूरी पर तैयार फंदे से झूले गुनहगार

बलिया: सोलह दिसम्बर 2012 की काली रात को देश की राजधानी दिल्ली में हुए गैंगरेप की घटना से बागी धरती यानी निर्भया का गृह जिला बलिया भी हिल उठा था। इस जघन्यतम घटना के सात सालों बाद गुनहगारों की फांसी से बागी धरती के लोगों को सुकून मिला है। जगह-जगह मिठाई बांट कर खुशी मनाई जा रही है। निर्भया गैंगरेप ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। इस घटना के बाद अब तक के घटनाक्रमों पर नजर डालें तो हालात काफी बदल गए हैं। 2012 में 16 दिसम्बर की रात में दिल्ली के वसंत बिहार इलाके में अंजाम दी गई इस घटना के सामने आते ही समूची दुनिया आक्रोशित हो उठी थी। महीनों तक समाज के हर तबके ने रोष प्रकट किया था। स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं ने भी कैंडल मार्च निकाले।

बीते सात सालों के पन्नों पर नजर डालें तो 16 दिसम्बर को हुई घटना के बाद निर्भया के जीवन को लेकर मंदिरों में प्रार्थनाएं आयोजित की गईं। जगह-जगह हवन-पूजन किए गए। 29 दिसम्बर को सिंगापुर के अस्पताल में मौत के बाद आक्रोशित लोग रो पड़े थें। जिसने सुना वही निर्भया के पैतृक गांव की ओर चल पड़ा। 31 दिसम्बर को निर्भया के माता-पिता उसकी अस्थियां लेकर आए तो देश-विदेश की मीडिया के नुमाइंदे भी आए। विश्व की बड़ी-बड़ी न्यूज एजेंसियों ने कवरेज किया।

पैतृक गांव के पास भरौली में गंगा घाट पर अस्थियां विसर्जित की गईं तो गड़हांचल के नाम से विख्यात निर्भया के पैतृक गांव के आसपास के इलाके के हजारों लोग उसमें शामिल हुए। इसके बाद निर्भया के गुनहगारों को सजा देने के लिए चली अदालती कार्यवाही पर गृह जिले के लोगों की नजर बराबर बनी रही। गुनहगारों को सजा होने और बीते सालों में सजा के बार-बार टलने से लोग मर्माहत होते रहे।

शुक्रवार को तड़के चारों गुनहगारों को फांसी की सजा होते ही निर्भया के गांव क्षेत्रीय लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। क्षेत्र में सामाजिक कार्यों में लगे गड़हा विकास मंच के अध्यक्ष चंद्रमणि राय, बिजेंद्र राय समेत काफी संख्या में लोग पहुंचे। निर्भया के दादा और चाचा से गले मिले और बधाई दी। 16 दिसम्बर की घटना के बाद 29 दिसम्बर को निर्भया ने अंतिम सांस ली थी। उसके बाद दिल्ली में तत्कालीन संप्रग की अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत पक्ष-विपक्ष के तमाम बड़े नेता निर्भया के दिल्ली स्थित घर पर सांत्वना देने पहुंचे थे। यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी 11 जनवरी 2012 को निर्भया के गांव हेलीकॉप्टर से आए थे।

उन्होंने निर्भया के पैतृक घर जाकर परिजनों से भेंट की थी। उन्होंने निर्भया के गांव सरकारी अस्पताल की घोषणा की थी, क्योंकि निर्भया के माता-पिता ने उनसे कहा था कि हमारी बेटी डॉक्टर बनना चाहती थी। उस घोषणा के मुताबिक सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मूर्त रूप ले चुका है। यही नहीं अखिलेश यादव ने निर्भया के गांव तक पक्की सड़क बनवाने की घोषणा भी की थी। उसके दोनों भाइयों को सरकारी नौकरी देने की बात भी हुई थी। दिल्ली में भाजपा के कद्दावर नेता विजेंद्र गुप्ता भी निर्भया के गांव पहुंचे थे।

संयोग देखिए कि निर्भया के गुनहगार जिस फांसी के फंदे से दिल्ली के तिहाड़ जेल में झूले, वह निर्भया के पैतृक गांव से महज 13 किलोमीटर की दूरी पर ही स्थिति बिहार के बक्सर की सेंट्रल जेल में तैयार हुआ है। देश में अभी तक दी जाने वाली फांसी बक्सर के सेंट्रल जेल में बनी खास मनीला रस्सी से ही दी जाती है। निर्भया के पैतृक गांव के लोगों का मुख्य बाजार बक्सर ही है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper