संसद में देश के अन्नदाताओं के लिए ‘आंदोलनजीवी’ शब्द किसने प्रयोग किया था?: प्रियंका गांधी

नई दिल्ली। लोकसभा सचिवालय ने एक सकरुलर जारी किया है जिसमें उन शब्दों की सूची दी गई जिसे असंसदीय करार दिया गया है। अगर ये शब्द संसद में बोले गए तो उन्हें संसद की कार्यवाही से हटा दिया जाएगा। इस सकरुलर के जारी होने के बाद कांग्रेस केंद्र पर हमलावर हुई है। प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना बनाते हुए कहा, सरकार की मंशा है कि जब वो। भ्रष्टाचार करे, तो उसे भ्रष्ट नहीं, भ्रष्टाचार को ‘मास्टरस्ट्रोक’ बोला जाए। 2 करोड़ रोजगार, किसानों की आय दुगनी जैसे जुमले फेंके, तो उसे जुमलाजीवी नहीं; ह्यथैंक यू’ बोला जाए। संसद में देश के अन्नदाताओं के लिए आंदोलनजीवी शब्द किसने प्रयोग किया था?

सकरुलर के अनुसार, जुमलाजीवी, कोविड स्प्रेडर, करप्ट, ड्रामा, हिपोक्रेसी जैसे शब्दों को असंसदीय शब्दों की सूची में रखा गया है। कांग्रेस वरिष्ठ नेता मलिकार्जुन खड़गे ने कहा, भाजपा ने इन शब्दों का पहले इस्तेमाल किया है, तो हमको इस्तेमाल करने में क्या दिक्कत है? सरकार को लगता होगा इन शब्दों के इस्तेमाल होने से उनकी छवि को धक्का लगेगा। हम इन शब्दों का इस्तेमाल करते रहेंगे।

इसके साथ ही कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, मोदी सरकार की सच्चाई दिखाने के लिए विपक्ष द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सभी शब्द अब ‘असंसदीय’ माने जाएंगे। अब आगे क्या विषगुरु? दरअसल संसद के मानसून सत्र की शुरूआत होने से पहले लोकसभा सचिवालय ने ‘असंसदीय शब्द 2021’ शीर्षक के तहत ऐसे शब्दों एवं वाक्यों का नया संकलन तैयार किया है जिन्हें ‘असंसदीय अभिव्यक्ति’ की श्रेणी में रखा गया है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... ------------------------- ------------------------------------------------------ -------------------------------------------------------- ------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------- --------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------   ----------------------------------------------------------- -------------------------------------------------- -----------------------------------------------------------------------------------------
----------- -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper