सरकारी ठेके से बिकी मौत

फिर एक बार जहरीली शराब पीने से बाराबंकी में अब तक 21 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों ने रामनगर थाना क्षेत्र के रानीगंज गांव स्थित सरकारी दुकान से 27 मई की रात शराब खरीद कर पी थी। जहरीली शराब की चपेट में 75 लोग अस्पताल में इन पंक्तियों के लिखे जाने तक जिंदगी और मौत के बीच थे। मृतकों में एक ही परिवार के चार लोग भी शामिल हैं। अलग-अलग गांवों के लोगों ने इसी सरकारी दुकान से शराब खरीद कर पी थी। ऐसे में मरने वालों की संख्या बढ़ भी सकती है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सभी ने रात में शराब पी और आधी रात के बाद उनकी तबीयत बिगडऩे लगी। परिवारीजन उन्हें सीएचसी सूरतगंज, फतेहपुर व रामनगर ले गए, जहां से जिला अस्पताल और फिर लखनऊ के अस्पतालों में भेजा गया।

बाराबंकी में जो शराब जहरीली हुई, वही शराब अन्य जिलों में भी सप्लाई की गई है। एडीजी की मानें तो विंडीज पावर हाउस ब्रांड के जिस बैच की देसी शराब बाराबंकी में सप्लाई की गई थी, वही शराब अन्य जिलों में भी सप्लाई की गई थी। एडीजी के अनुसार, रानीगंज गांव की दुकान से विंडीज और पावर हाउस ब्रांड की देसी शराब बेची गई थी। आबकारी विभाग जांच में खुलासा हुआ है कि कुछ लोगों ने शराब की दुकान से सीलबंद बोतल ली थी और कुछ न खुली बोतल मिलने की बात कही है। संभवत: जांचें खानापूर्ति में शामिल हैं। जांचों पर कार्रवाई होती, तो प्रदेश में जहरीली शराब से होने वाली मौतों को तारीख यही मिलती। शराब माफिया का तंत्र इतना मजबूत है कि अधिकारी वह कदम नहीं उठा पाते, जिससे मस्ती के घूंट मौत में न बदलें। आबकारी विभाग सरकार के खजाने में सबसे अधिक राजस्व देता है, इसलिए सरकार भी जहरीली शराब से हुई मौतों की लीपापोती में अफसरों का साथ देती है।

इसी वर्ष 11 फरवरी को सहारनपुर और 9 फरवरी को कुशीनगर में जहरीली शराब पीने से 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। बाराबंकी में ही जनवरी, 2018 में चार लोगों की मौत हुई। मई, 2018 में कानपुर देहात में भी जहरीली शराब से मौत का तांडव हुआ। 2015 से 2017 पर नजर डाली जाए, तो लखनऊ के मोहनलाल गंज (50), एटा (24) और आजमगढ़ (25) को मिलाकर 99 मौतें हो चुकी हैं। शराब की शीशी सबका खाय गए : शराब की लत कैसे जिंदगियां तबाह करती है, इसका ताजा उदाहरण है रानीगंज गांव। रानीगंज के छोटेलाल और उसके तीन बेटों ने 27 मई की रात शराब पी। कुछ ही समय बीता था कि सभी की हालत बिगडऩे लगी। पेट में तेज दर्द के साथ उल्टियां शुरू हो गईं। छोटेलाल (60 वर्ष) के सबसे बड़े पुत्र रमेश (35 वर्ष) की घर पर ही मौत हो गई। अस्पताल ले जाते समय मझले बेटे मुकेश (28 वर्ष) की मौत हो गई।
छोटे पुत्र सोनू (25 वर्ष) और छोटेलाल को परिजन सीएचसी सूरतगंज इलाज के लिए लेकर पहुंचे, तो डॉक्टरों ने छोटेलाल को मृत घोषित कर दिया। थोड़ी देर में सोनू ने भी दम तोड़ दिया। छोटेलाल के 6 पुत्र थे। तीन पुत्र- विकास, आकाश और मोनू शराब से दूर थे। ये तीनों बच गए।

जो लोग जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं, उनमें कई की आंखों की रोशनी जाने का डर है और कई की किडनी खराब होने की आशंका है। केजीएमयू के चिकित्सकों के अनुसार, शराब में मिथाइल मिलाने की आशंका है। मिथाइल शरीर में पहुंचते ही दिमागी कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। जिससे आंख की रोशनी चली जाती है। किडनी भी क्षतिग्रस्त हो जाती है। जहरीली शराब के कहर पर प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 48 घंटे में जांच की रिपोर्ट मांगी है। इसके पहले इस घटना के जिम्मेदार माने गए 10 अधिकारियों और 5 पुलिस वालों को निलंबित कर दिया गया है और मृतकों के परिवार को दो-दो लाख रुपए की मदद का ऐलान हो गया है। पर यह कब ऐलान होगा कि प्रदेश में जहरीली शराब नहीं बिकेगी? ठ्ठआलोक निगम

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