सरहद पर तैनात हमारा कोई भी जवान कोरोना से संक्रमित नहीं : जनरल रावत

नई दिल्ली: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने कहा कि कोरोना की महामारी से निपटने के लिए पूरा देश एकजुट है। इसे लेकर समय-समय पर तीनों सेनाओं के पास प्रधानमंत्री की तरफ से निर्देश आ रहे हैं। कैबिनेट सेक्रेटरी बैठक कर रहे हैं। जनरल बिपिन रावत ने कहा स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा तीनों सेनाओं को निर्देश दिए जा रहे हैं। अगर हमें अपने देशवासियों का बचाव करना है तो पहले खुद तीनों सेनाओं को अपना बचाव करना होगा। उन्होंने बताया कि सरहद पर तैनात हमारा कोई भी जवान कोरोना से संक्रमित नहीं है।

जनरल रावत ने कहा इस समय हमारे पास किसी भी चीज की कमी नहीं है। तीनों सेनाओं ने देश के अलग अलग इलाकों में कोविड हॉस्पिटल तैयार किए हैं। रक्षा मंत्री ने भी तीनों सेनाओं के कमांडर इन चीफ से बात करके सेना की तैयारियों का जायजा लिया है। सीडीसी बिपिन रावत ने बताया कि हमारे जवानों को भी कुछ-कुछ असर हुआ है, लेकिन हम काफी सावधानी बरत रहे हैं। हमने अपने कुछ अधिकारियों को क्वारनटीन में रखा है। सेना के जो लोग संक्रमित हुए हैं उन्हें क्वारनटीन किया गया है। 3 मई के बाद अगर ढील दी जाती है तो हमारे जवानों की आवाजाही बढ़ेगी। उसके लिए हम तैयारी कर रहे हैं। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने कहा अभी तक हमारे जो जवान सरहद पर तैनात हैं, वहां पर कोरोना संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है।

हमारे जो नौसैनिक जहाज और सबमरीन में तैनात हैं, इसके अलावा जो हमारे जो वायु सैनिक और पायलट हैं, उनमें से कोई भी अभी तक कोरोना से संक्रमित नहीं हुआ है। जनरल बिपिन रावत ने बताया कि कोरोना के मामले में हमारी तमाम एजेंसियों ने जिस तरह से काम किया है उससे हमें काफी फायदा भी हुआ है। मेक इन इंडिया के जरिए हमारी कई कंपनियां वेंटिलेटर बना रही हैं। डीआरडीओ ने एम 99 मास्क तैयार किया है। अगर हम चाहें तो अपने देश में ही यह सारी चीजें बना सकते हैं।

जनरल बिपिन रावत ने कहा, कोरोना ने हमें एक सबक सिखाया है कि हमारी तीनों सेनाओं के पास जो हथियार और साजो सामान हैं वो हम स्वदेशी बना सकते हैं। हमें तीनों सेनाओं के लिए हथियार और दूसरे साजो सामान अब काफी हद तक मेक इन इंडिया में बनाने की तरफ आगे बढ़ना चाहिए। इसके लिए हमें अपने आईआईटी, प्राइवेट इंडस्ट्री और तीनों सेनाओं को मिलकर काम करना होगा। इससे आने वाले दिनों में तीनों सेनाओं का आयात भी कम हो जाएगा और हम रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेंगे।

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