सहकारी संस्थाओं ने लगाया सरकार को करोड़ों का चूना

भोपाल: मध्य प्रदेश के एक दर्जन जिला सहकारी बैंकों और 300 से अधिक सहकारी समितियों ने सरकार को करीब 17 करोड़ रुपए का चूना लगा दिया है। यह पैसा इन संस्थाओं को सरकार ने गेहूं और धान खरीदी सहित अन्य योजनओं के लिए दिया था। यह पूरा घोटाला बीते कई वर्षों मेें किया गया है। इसका खुलासा शुरुआत में न हो पाने की वजह कई वर्षों से एकाउंट का ठीक से सत्यापन नहीं होने की वजह से नहीं हुआ। करीब चार माह पहले सहकारिता विभाग ने बैंको को दिए गए पैसों का सत्यापन करवाया तो यह मामला पता चला। हालांकि, इसमें से छह सहकारी बैंकों और 150 समितियों के हिसाब में भारी गड़बड़ी पकड़ी गई है।

सरकार गेहूं-धान खरीदी और किसान के लिए फसल बीमा सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए सहकारी बैंकों को हर साल अरबों रुपए देती है। यह बैंक सहकारी समितियों को अपनी क्रेडिट के लिए पैसे दिए जाते हैं। एक जिला बैंक के अधीन करीब 150 समितियों काम करती हैं। सहकारी बैंकों और समितियों का ऑडिट कराया तो काफी अनियमितता सामने आई। करोड़ों रुपए का हिसाब भी नहीं मिला। इस मामले में समितियों का कहना था कि गेहूं धान खरीदने के बाद जो पैसे बचे थे, वह बैंकों को लौटा दिए थे। समय-समय पर अनाज के शॉर्टेज के बारे में भी खाद्य विभाग को जानकारी दे दी गई है।

धान खरीदी में भी हेराफेरी

इस वर्ष खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम और मार्कफेड के माध्यम से धान खरीदी गई है। खरीदी गई धान और करोड़ों रुपए का हिसाब नहीं मिल रहा है। इनमें जबलपुर, बालाघाट, मंडला, नरसिंहपुर, सिवनी, सीधी, शहडोल की जिला सहकारी बैंक और सहकारी समितियां शामिल है। सहकारिता विभाग ने इन समितियों से धान और राशि के अंतर के संबंध में जानकारी मांगी है।

छह जिलों में 12 करोड़ों का घपल

सहकारिता विभाग ने छतरपुर, जबलपुर, सिवनी, ग्वालियर, रायसेन, होशंगाबाद में कलेक्टरों की अध्यक्षता में टीम बनाई है। यहां पांच साल के लेन-देन का हिसाब नहीं मिल रहा है।

पकड़ा गया था एक करोड़ का मामला

दो साल पहले होशंगाबाद जिले के सहकारी बैंक से एक करोड़ से अधिक राशि गायब होने का मामला सामने आया था। जांच में बैंक कर्मचारी और सहकारिता विभाग के अधिकारियों की मिली भगत उजागर हुई थी।

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