सहारनपुर के बेहट से दिखा सूर्य ग्रहण का स्‍पष्‍ट नजारा, लोगों ने कैमरे में कैद की तस्वीरें

मेरठ: रविवार को सू्र्य ग्रहण लग गया है। भारत में सू्र्य ग्रहण सुबह 10 के बाद ही दिखाई देना शुरु हुआ। यह साल का पहला और आखिरी सूर्य ग्रहण है। सहारनपुर के बेहट में सूर्य ग्रहण का साफ नजारा देखने को मिला। ग्रहण के दौरान आसमान में पल पल नजारे बदले बदले से नजर आ रहे थे। मेरठ और सहारनपुर मंडल में बड़ी संख्‍या में लोगों ने घरों के भीतर पूजा पाठ शुरू कर दिया था।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस रविवार को लगने वाला सूर्य ग्रहण मेरठ की धरती से भी साफ दिखाई देगा। मेरठ में सूर्य ग्रहण 94.3 फीसद दिखेगा। सूर्य ग्रहण के समय सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी 15,02,35,882 किमी होगी। पृथ्वी व चंद्रमा के बीच दूरी 3,91,482 किमी होगी। इन्हीं दूरियों का संबंध ही इसे कंगनकार बनाएगा। कंगन की शक्ल अधिकतम 30 सेकेंड तक रहेगी। यह स्थिति लगभग 900 वर्षों बाद दोहराई जा रही है । पांच जुलाई को फिर चंद्र ग्रहण होगा है।

मेरठ में सूर्यग्रहण 10 बजकर 21 मिनट से शुरू होगा। 12 बजकर तीन मिनट पर अधिकतम होगा। दोपहर 1:50 बजे समाप्त होगा। प्रगति विज्ञान संस्था के सुशांत सिटी स्थित कार्यालय से सूर्य ग्रहण देखने की विशेष व्यवस्था है। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम तैयार की गई हैं। शनिवार को आयोजित कार्यशाला में साक्षी, खिरद जेहरा, सिमरन, रोहिणी, पलक, मुकूल और नकुल शामिल हुए। इसका देश के कई हिस्सों से भी सीधा प्रसारण विज्ञान आओ करके सीखे के ऑनलाइन यू-ट्यूब चैनल पर किया जायेगा।

सूतक लगने के साथ ही शनिवार शाम आरती के बाद रात 10 बजे शहर के सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। औघड़नाथ मंदिर में भगवान की आरती के बाद पुजारियों ने रात में गर्भ गृह के कपाट बंद कर दिए। मंदिर में रविवार आरती नहीं होगी। 21 जून को दोपहर ढ़ाई बजे के बाद शुद्धीकरण के बाद मंदिरों में पूजा अर्चना होगी। 21 को वर्ष का सबसे लंबा दिन होगा। ग्रीन जोन में होने के कारण साकेत शिव मंदिर भक्तों के लिए खुला है। पुजारी तारानंद झा ने बताया कि मंदिर के कपाट रात दस बजे बंद कर दिए। रविवार दोपहर ढ़ाई बजे शुद्धिकरण के बाद मंदिर दर्शन को खोला जाएगा। सूतक के समय भगवान के दर्शन व स्पर्श निषेध होता है।

अनुराधा गोयल ने बताया कि मेष, कन्या और मकर राशि को छोड़कर शेष राशि वालों के लिए सूर्य ग्रहण के प्रभाव नकारात्मक ही रहेंगे। दान आदि कर हम इसके प्रभाव को कम कर सकते हैं। बिल्वेश्वर संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डा. चिंतामणि जोशी ने बताया कि ग्रहण के समय मिथुन राशि में सूर्य और चंद्र रहेंगे। इस राशि के जातक विशेष सावधानी रखें। ग्रहण काल में मंत्र जप करने से कई गुना प्रभाव देखने को मिलता है। ज्योतिषविद् भारत ज्ञान भूषण ने कहा कि ग्रहण काल में छह ग्रह वक्रीय रहेंगे। ग्रह नक्षत्रों की ऐसी स्थितियां 1090 साल बाद बन रही हैं। इसके बाद ही मंदिरों में पूजन आदि होगा। इसका प्रभाव 14 दिसंबर तक रहेगा।

जमीयत उलमा के जिलाध्यक्ष जैनुर राशिदीन ने कहा है कि 21 जून को सूर्य ग्रहण है। ऐसे समय में नमाज कुसूफ पढ़ी जाती है। कहा कि इस दौरान नमाज पढ़नी चाहिए और गरीबों की मदद करनी चाहिए। नायब शहर काजी ने कहा कि अल्लाह ताला से पनाह मांगने के लिए नमाज अदा करें और गुनाहों की माफी मांगे। कहा कि नमाज घर में ही पढ़ें।

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