साधुओं की हत्या की CBI जांच की मांग पर सुनवाई आज SC में

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में पालघर में दो साधुओं की लिंचिंग मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर याचिका दाखिल की गई है. साधुओं के रिश्तेदारों और जूना अखाड़ा के साधुओं ने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दाखिल की है. साधुओं का केस लड़ रहे वकील के एक सहयोगी की पिछले महीने सड़क हादसे में मौत हो चुकी है.

देश की सबसे बड़ी अदालत में दाखिल याचिका में कहा गया है कि उन्हें महाराष्ट्र सरकार और पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है क्योंकि इस मामले में शक की सुईं पुलिस पर ही है. याचिका में आगे कहा गया कि ऐसे में पुलिस से सही तरीके से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है. इसलिए जांच सीबीआई से कराई जाए. सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर आज गुरुवार को सुनवाई करेगा. हालांकि इसी तरह की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस से जांच की स्टेट्स रिपोर्ट मांगी थी.

पिछले हफ्ते पालघर लिंचिंग केस की जांच में एक नया मोड़ उस समय आ गया जब इस मामले में 32 साल के एक शख्स ने कथित रूप से खुदकुशी कर ली. इस शख्स से घटना की जांच कर रही सीआईडी ने पूछताछ की थी. पिछले हफ्ते शनिवार शाम को एक पेड़ से इस युवक का शव लटका हुआ मिला. पालघर लिचिंग केस में पिछले महीने मई के मध्य में साधुओं का केस लड़ रहे वकील के एक सहयोगी की सड़क हादसे में मौत हो गई है. मृतक का नाम दिग्विजय त्रिवेदी है. ये हादसा बुधवार को मुंबई-अहमदाबाद हाइवे पर हुआ, जब दिग्विजय त्रिवेदी अपनी कार से कोर्ट की ओर जा रहे थे. हादसे में मौत के बाद भी राजनीतिक स्तर पर सवाल उठाए गए.

घटना अप्रैल की है जब देश में कोरोना की वजह से लॉकडाउन का शुरुआती चरण था और पालघर से कुछ दूर एक गांव में भीड़ ने चोरी के शक में दो साधुओं और उनके ड्राइवर की हत्या कर दी थी. 16-17 अप्रैल की रात जब ये दो साधु अपने ड्राइवर के साथ गांव से गुजर रहे थे, तब लोगों को चोरों के आने का शक हुआ. और फिर भीड़ ने पीट-पीटकर इन साधुओं की हत्या कर दी. भीड़ के हत्थे चढ़े साधु मुंबई के जोगेश्वरी पूर्व स्थित हनुमान मंदिर के थे. ये साधु मुंबई से सूरत अपने गुरु के अंतिम संस्कार में जा रहे थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते पुलिस ने इन्हें हाइवे पर जाने से रोक दिया. फिर गाड़ी में सवार साधु ग्रामीण इलाके की तरफ मुड़ गए, जहां मॉब लिंचिंग के शिकार हो गए.

इस दौरान वहां पर पुलिसकर्मी खड़े रहे और तमाशा देखते रहे. पुलिसकर्मियों की लापरवाही की बात सामने आने के बाद प्रशासन ने एक्शन लिया और कई पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया. पालघर हिंसा के राजनीतिक स्तर पर तूल पकड़ने के बाद 100 लोगों को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तार होने वालों में 9 नाबालिग भी शामिल थे. विपक्ष ने इस हिंसा के लिए महाराष्ट्र सरकार पर लगातार दबाव बनाया था. इस बीच पिछले दिनों पालघर हिंसा में शामिल एक आरोपी कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया. आरोपी जिस सेल में हिरासत में लिया गया था, वहां के अन्य आरोपियों को भी

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