साधुओं को मंत्री बनाये जाने पर अखाड़ा परिषद ने शिवराज सरकार की निंदा की

दिल्ली ब्यूरो: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जिन्हें प्रदेश के बच्चे मामा कहकर पुकारते हैं इन दिनों संत साधुओं को लेकर खास चर्चा में हैं। उनकी चारो तरफ चर्चा हो रही है। राजनीतिक गलियारों में मामा जी विपक्ष के निशाने पर तो प्रदेश वासियों की नजर में राजनीतिक खिलाड़ी कहे जाने लगे हैं। राहुल गांधी ने शिवराज पर बड़े हमले किये हैं लेकिन शिवराज सिंह चुप्पी मारे सब सुन देख रहे हैं।

दरअसल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पिछले दिनों पांच साधुओ को राज्य मंत्री का दर्जा दे दिया। ऐसा उन्होंने क्यों किया कोई नहीं जानता। मजे की बात तो यह थी कि मंत्री का दर्जा पाए दो साधू पहले शिवराज सरकार के कटु आलोचक भी रहे। जब इन कटु आलोचकों को मंत्री का दर्जा दिया गया तो वे अचानक विपक्ष के निशाने पर चढ़ गए। शिवराज सिंह की पार्टी के भीतर भी कड़ी निंदा लोग कर रहे हैं। माना जा रहा है कि आगामी चुनाव को देखते हुए ही शिवराज सिंह ने यह खेल किया है। उन्हें डर था कि नर्मदा परिक्रमा की कही पोल साधू समाज खोल ना दे। लोग कह रहे हैं कि साधू लोग भी कोई दूध के धुले नहीं है। लालची भी है और राजनीति से धुरंधर भी।

इधर अब साधुओं को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् ने बड़ा बयान दिया है और साधु से मंत्री से बने लोगों को कड़ी फटकार भी लगाईं है। अखाड़ा परिषद ने मध्य प्रदेश में संतो के राज्य मंत्री का ओहदा लेने की निंदा की है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी ने आज यहां कहा कि संत का दर्जा किसी भी मंत्री से कहीं ऊपर होता है। संतों को इस प्रलोभन को ठुकराना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर समाज में संतों के प्रति सम्मान निश्चित तौर पर घटेगा।

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने संत समाज को इस प्रकार का प्रलोभन देकर निश्चित तौर पर निंदनीय कार्य किया है। महंत ने कहा कि यदि संत मंत्री हो जाये तो कैसा सम्मान। मंत्री को संत होना चाहिए और संतो को राज्य वैभव से अपने को दूर रखना चाहिए। सत्ता संतो के लिए नहीं होती और उन्हें परोककार के लिए किसी पद की आवश्यकता भी नहीं होनी चाहिए। पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण के श्रीमहन्त महेश्वर दास ने कहा कि संत का सत्य के मार्ग का पालन और जन कल्याण के हित की बात सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रलोभन और संत का कोई मेल नहीं है। संत के लिए माया, प्रलोभन इत्यादि विष्ठा के समान है।

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