साम्प्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए आगे भी हो सकता है गठबंधन: मायावती

लखनऊ। बसपा सुप्रीमों मायावती ने शनिवार को अपने आवास पर राज्यसभा में बसपा प्रत्याशाी की हार पर पत्रकारों के सामाने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बसपा और सपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा मिल कर भाजपा के 9वें प्रत्याशी को रोकने के लिए गठबंधन हुआ था। राज्यसभा के बदले उपचुनाव में समर्थन देने और परिषद चुनाव में भी दूसरे प्रत्याशी को जिताने की रणनीति बनी थी। बसपा उपचुनाव नहीं लड़ती है इसलिए भाजपा को रोकने के उद्देश्य से सपा को समर्थन दिया गया और उसका परिणाम भी धमाकेदार रहा।

मायावती ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया और विधायकों की खरीद-फरोख्त कर विशेषकर बसपा उम्मीदवार को हराने के लिए हथकंडे अपनाये गये। सपा-बसपा की जो नजदीकी बढ़ रही थी उसे रोकने के लिए भाजपा ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया। सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग कर आतंक का माहौल बनाया गया। इस वजह से भी कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग किया। इसके बावजूद जिन लोंगो ने क्रॉस वोटिंग नहीं कि मैं उन्हें बधाई देती हूं।

अति पिछड़ों और अति दलितों के आरक्षण पर भाजपा को पूरा समर्थन

मायावती ने कहा कि योगी सरकार यूपी में अति पिछड़ों और अति दलितों को अलग से आरक्षण देने की काम कर रही है, तो बीएसपी को कोई ऐतराज नही है। बीएसपी पूरा समर्थन करेगी।

बसपा का बागी विधायक पार्टी से बाहर

मायावती ने कहा कि बसपा को केवल एक विधायक अनिल सिंह ने दगा दिया, उसे पार्टी से बाहर कर दिया गया है। उसने व्यवसायिक कारणों से क्रॉस वोटिंग की। जिसने कहा कि मेरी अंतरात्मा नही कह रही कि मैं बसपा को वोट करूं। सत्ताधारी दल के सहयोगी पार्टी के कैलाश नाथ सोनकर ने आत्मा की आवाज पर बसपा को वोट दिया। उनको धन्यवाद देती हूं। बसपा कांग्रेस और सपा के 7-7 वोटों के लिए उन्हें धन्यवाद देती है।

कांग्रेस को मैने हमेशा सहयोग किया है

कांग्रेस के सातों विधायकों ने ईमानदारी से बसपा को वोट किया। मीडिया में क्रॉस वोटिंग की खबर पूरी तरह गलत। उन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा से वोट दिया। मैं उन्हें व शीर्ष नेतृत्व को धन्यवाद देतीं हूँ। कांग्रेस को हमने हमेशा बिना शर्त के समर्थन दिया हूं। कांग्रेस से मेरी कोई दूरी नही है। रालोद का वोट हमें नहीं मिला, रालोद विधायक ने दो दलों को प्रथम वरीयता का वोट दिया, जो अवैध रहा, इस पर हमें विचार करने की आवश्यकता है।

माया ने कहा कि भाजपा का लडडू खाकर जश्न मनाना गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनावों में मिली हार का बदला कभी नहीं हो सकता। वहां जनता सीधे वोट करती है जबकि राज्यसभा चुनाव में धनबल और बाहुबल के साथ सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग भी होता है। जिसमे भाजपा के लोंगो को महारत हासिल है।

अखिलेश को राजा भैया से सावधान रहने की जरूरत

यदि अखिलेश राजा भैया जिन्हें भाजपा के लोग खास कर कल्याण सिंह कुंडा का गुण्डा कहते थे उनके चक्कर में न आते तो इस साजिश को नाकाम किया जा सकता था। राजनीति में अभी कम तजुर्बेकार हैं अखिलेश इस षडयंत्र से बसपा और सपा के संबंधों में कोई दरार नहीं आएगी। अब दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता सावधान हो कर और मजबूती से साथ काम करें।

बसपा लोकसभा और विधानसभा चुनाव में अब किसी का सहयोग नही करेगी

माया ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के उपचुनाव में सक्रिय कार्यकर्ताओं को किसी के सहयोग के लिए नही लगायेगी। बसपा के कार्यकर्ता अब पोलिंग बूथ स्तर पर सक्रिय रूप से काम करेंगे। जिससे बसपा जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत हो सके।

भाजपा के साथ हैं तो अच्छे नही तो बुरे

मायावती ने कहा कि पार्टी के लोगों से सावधानी पूर्वक बताना चाहती हूं कि जबसे सपा से नजदीकियां बढ़ी हैं तबसे भाजपा के लोग अनर्गल बयानबाजी कर रहे है। बसपा ने 2 बार भाजपा से मिल कर सरकार बनाई है तब बसपा बुरी नहीं थी पर जैसे किसी और दल से नजदीकी बढ़ी है बसपा बुरी हो गयी, ऐसी दोगली राजनीति मानसिकता क्यों, हमारे लोग जानना चाहते हैं।

स्टेट गेस्ट हाउस कांड से अखिलेश का कोई लेना देना नही

मायावती ने कहा कि 2 जून 1995 को स्टेट गेस्ट हाउस कांड के समय अखिलेश यादव का राजनीति से कोई लेना देना नहीं था। भाजपा के लोग उस कभी न भूल देने वाली घटना को दुष्प्रचारित कर रहे है।मायावती ने कहा कि भाजपा ने उसी पुलिस अधिकारी को वर्तमान में यूपी का डीजीपी बनाया है जिसके संरक्षण में स्टेट गेस्ट हाउस कांड करवाया गया था। जो जख्म पर नमक लगाने का काम किया है।

मायावती ने कहा कि उसे डीजीपी बना कर सरकार बसपा मूवमेंट को खत्म करने के उद्देश्य से मेरी हत्या तो नहीं करना चाहते ये सोचने वाला विषय। भाजपा और आरएसएस दोंनो मिल कर बाबा साहब के विचारों को समाज मे फैलने नहीं देना चाहती। अब ऐसा ज्यादा दिन नहीं चल पाएगा। अबकी जनता इन्हें 14 वर्षों नहीं हमेशा के लिए वनवास भेज देगी।

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