सिंगल यूज प्लास्टिक डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बना रहनुमा

नई दिल्ली: देशभर में फैले कोरेाना संक्रमण के बीच सिंगल यूज प्लास्टिक डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए रहनुमा बनकर उभरा है। डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) बनाने में सिंगल यूज प्लास्टिक का ही इस्तेमाल हो रहा है। डॉक्टरों, नर्सों, कंपाउंडरों और मेडिकल स्टाफ को कोरोना संक्रमण से बचाने को पीपीई किट दी जा रही है।

एक माह में दोगुना हो गई खपत: कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ने के साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक (पॉलीप्रोपाइलीन) की खपत एक माह में दोगुना हो गई है क्योंकि इसका इस्तेमाल पीपीई बनाने में किया जा रहा है। इसके तहत डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों के लिए गॉगल्स, फेस शील्ड, मास्क, दस्ताने, गाउन, हेड कवर व शू कवर का निर्माण किया जा रहा है। साल 2018 में कुल पॉलिमर खपत में पॉलीप्रोपाइलीन की हिस्सेदारी 25% थी। 2018 में, डेटा एनालिटिक्स फर्म आईएचएस मार्किट के अनुसार, पॉलीप्रोपाइलीन की मांग 5.7% बढ़कर 74 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) हो गई। पॉलीप्रोपाइलीन की वैश्विक मांग 2030 तक 120 एमएमटी बढ़ने का अनुमान है।

आयात पर थी निर्भरता: पिछले माह तक, भारत की अधिकांश पीपीई जरूरतें आयात के जरिये पूरी हो रही थीं, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में घरेलू उत्पादन बढ़कर लगभग 13,000 पीपीई प्रति माह हो गया है। हवा भी नहीं जा सकती इस किट के अंदर: संक्रमित मरीज से भले ही सभी किनारा कर लें पर डॉक्टर को इलाज करना ही होता है। सिंगल यूज प्लास्टिक किट के अंदर हवा भी नहीं जा सकती।

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