सीबीआई रार में राजनीतिक रंग ,वर्मा के समर्थन में कांग्रेस पहुंची सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली ब्यूरो: सीबीआई के पीछे सीबीआई खेल में अब राजनीतिक रंग चटक होने लगा है। बीजेपी जहां अस्थान के साथ कड़ी दिख रही है वही कांग्रेस सीबीआई निदेशक वर्मा के समर्थन में उतर गयी है। आज कांग्रेस नेता मलिकार्जुन खड़गे वर्मा को छुट्टी पर भेजने के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए। आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। खड़गे का कहना है वर्मा को छुट्टी पर भेजने का केंद्र का फैसला गैरकानूनी और सीबीआई एक्ट का उल्लंघन है।

कांग्रेस के नेता खड़गे ने कहा कि सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ,प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता की कमेटी ही सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति के बारे में कोई फैसला कर सकती है। उन्होंने कहा कि यहां तक कि केंद्रीय सर्तकता आयोग यानी सीवीसी को भी सीबीआई डायरेक्टर के खिलाफ फैसला लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी ओर से संज्ञान लेकर अचानक जिस तरह सीबीआई डायरेक्टर को छुट्टी पर भेज दिया वह गैरकानूनी और सीबीआई एक्ट के खिलाफ है। उन्होंने इस बात की पुष्टि कि वह सुप्रीम कोर्ट में सरकार के इस कदम के खिलाफ याचिका दायर कर चुके हैं।

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक चूंकि खड़गे सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति वाली कमेटी में शामिल है इसलिए पार्टी ने उन्हें इस मामले में याचिका दायर करने को कहा था। इससे पहले कांग्रेस ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि दिल्ली पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 की धारा 4ए और 4बी के तहत सीबीआई निदेशक की नियुक्ति या तबादला या निष्कासन चयन समिति ही कर सकती है। चयन समिति में प्रधानमंत्री, भारत के प्रधान न्यायाधीश और लोकसभा में नेता विपक्ष शामिल होते हैं।

उधर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरेजवाला ने कहा था कि , यह (वर्मा के खिलाफ कार्रवाई) इसलिए किया गया क्योंकि 24 अक्टूबर को वर्मा पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी द्वारा दी गई राफेल सौदे की शिकायत की जांच करने जा रहे थे। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि वर्मा को हटाने के बाद एजेंसी के 12 अधिकारियों का तबादला किया गया।

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