सुना है बहन जी राज्यसभा में आ रही हैं !

अखिलेश अखिल

जैसे ही बसपा प्रमुख मायावती ने यूपी उपचुनाव के लिए सपा को समर्थन देने का ऐलान किया लखनऊ से लेकर दिल्ली की सियासत गरमा गयी। राजनीतिक चर्चा यह होने लगी कि सपा के समर्थन के एवज में मायावती राज्यसभा की तैयारी कर रही हैं। लेकिन इस पर अभी किसी स्थाई मुहर लगती नहीं दिखती। आखिर इस सवाल का जबाब कौन देगा ? ना सपा और न हीं बसपा। लेकिन इस सवाल के साथ तर्क जुड़ता नजर आता है। चुकी राजनीति संभावनाओं का खेल है इसलिए इस सवाल में भी संभावना छुपी हुयी है।

आपको बता दें कि बीते साल मायावती ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देते वक्त उन्होंने केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पर यह आरोप लगाया था कि संसद के अंदर भाजपा के सदस्य किसी को बोलने नहीं देते और सभापति भी इस मामले में कुछ नहीं कर रहे हैं। ऐसे में अब यह माना जा रहा है कि मायावती को राज्य सभा भेजा जाय। उत्तर प्रदेश से 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की अधिसूचना पांच मार्च, 2018 को जारी होने वाली है।

बसपा के विधायकों की संख्या इतनी कम है कि पार्टी को इस आधार पर एक भी राज्यसभा सीट मिलती नहीं दिख रही है। इन दस सीटों में से आठ भाजपा के कोटे में जाती दिख रही हैं और समाजवादी पार्टी की एक सीट पर जीत तय है। बाकी बचे एक सीट को लेकर खेल चल रहा है। सपा के अतिरिक्त वोट, कांग्रेस वोट और बसपा वोट एकजुट हो जाएं तो यह सीट जीती जा सकती है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर मायावती को राज्य सभा सभी दलों के सहयोग से पहुँच जाती है तो भविष्य की सियासत भी साफ़ हो जायेगी और कांग्रेस -सपा -बसपा -रालोद का गठबंधन बन जाएगा। फिर यह गठबंधन बीजेपी से मुकाबला करने में सक्षम हो सकेगा।

हालांकि मायावती राज्य सभा जाएगी इस बात की अभी तक पुष्टि नहीं हो पायी है। बिहार से राजद ने भी मायावती को राज्य सभा भेजने का ऑफर दिया है जिसे उन्होंने इंकार कर दिया है। लेकिन सपा के लोगों की बातचीत से एक फाॅर्मूले का संकेत मिलता है। इसके मुताबिक सपा और कांग्रेस मायावती को खुलकर समर्थन का प्रस्ताव देंगी तो वे उम्मीदवार बनने को तैयार हो सकती हैं। क्योंकि राज्यसभा चुनावों में पार्टियां अपने विधायकों को किसी खास उम्मीदवार को वोट देने को बाध्य नहीं कर सकतीं और अगर ऐसे में सपा और कांग्रेस मायावती का खुलकर साथ नहीं देंगे तो क्राॅस वोटिंग का खतरा बना रहेगा और मायावती ऐसा जोखिम कभी नहीं लेंगी। खास तौर पर अमित शाह की अध्यक्षता वाली उस भाजपा के सामने जिसके पक्ष में पिछले कुछ सालों में कई राज्यसभा चुनावों में क्राॅस वोटिंग हुई है।

क्योंकि अगर ऐसा होता है और मायावती चुनाव हार जाती हैं तो इससे उनकी बची सियासी पूंजी भी दांव पर लग जाएगी। इन तमाम संभावनाओं के राजनितिक जानकार इस बात पर सहमत हैं कि अगर सपा, बसपा और कांग्रेस में समन्वय बन पाता है और ये लोग मिलकर मायावती को राज्यसभा भेजने में कामयाब होते हैं तो इससे उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत हो सकती है और 2019 का चुनावी खेल दिलचस्प हो सकता है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper