सुनिए जेटली जी! बूंदी के उलटे लटके किसान को अपना बजट क्यों नहीं दिखाते

अखिलेश अखिल

लखनऊ ट्रिब्यून दिल्ली ब्यूरो: बजट में तो बहुत कुछ कहा गया है। किसानो के लिए खासकर हालिया बजट में बहुत कुछ करने की बात कही गयी। संसद से लेकर सड़क तक इसी पर चर्चा भी जारी है लेकिन उधर राजस्थान बूंदी के किसान सूखते फसलों के लिए पानी की मांग अपने अजूबा प्रदर्शन से कर रहे हैं। गाँव के बाहर पेड़ों की टहनियों पर किसान उलटा लटक कर पानी पानी चिल्ला रहे हैं। किसान कह रहे हैं जबतक सरकार पानी नहीं देगी उलटा लटकने का खेल चलता रहेगा।

राजस्थान में बीजेपी की सरकार है। इसी साल के अंत में वहाँ विधान सभा का चुनाव होना है। लेकिन इस चुनाव से किसानो को कोई लेना देना नहीं। किसानो के खेत पानी के अभाव में सूख से गए हैं और उनकी फसलें मारी गयी है। किसान कह रहे हैं है कि जब पानी ही नहीं मिलेगा तो खेती कैसे करेंगे। खेती नहीं तो भूख से मर जाएंगे। बार बार सरकार से पानी की मांग करने के बाद भी सर आश्वासन मिल रहा है लेकिन पानी का दर्शन नहीं है। क्या आश्वासन से खेती होगी ? किसीके पास कोई जबाब नहीं। सब चुप्पी मारे बैठे हैं।

भाजपा शासित राज्य राजस्थान के बूंदी जिले में किसान पिछले पांच दिनों से अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहें हैं। किसानो की मांग है कि उन्हें अपने सूख रहे फसलों के लिए नाहर का पानी उपलब्ध कराया जाए। आपको बता दें कि अभी तो बूंदी के लोग खेत के लिए पानी मांग रहे हैं मार्च के बाद अपने लिए पानी मांगेंगे। यहां पानी का घोर अभाव है। लेकिन सरकार आज तक यहां पानी का मुकम्मल इंतजाम नहीं कर पायी है। बार बार सरकार के लोगों से पानी की मांग करके बूंदी के किसान अब थक से गए हैं।

अब प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए किसान पेड़ पर उल्टा लटक कर प्रदर्शन कर रहें हैं। किसानो ने अपनी मांग रखने के लिए पहले तो अनशन किया फिर जब प्रशासन ने उन्हें अनदेखा कर दिया तब जा कर वो पेड़ पर उल्टा लटक गए। किसान कह रहे हैं कि जबतक पानी नहीं मिलेगा किसान पेड़ से लटकते रहेंगे। बजट में जो बातें कही गयी है उसका लाभ तो किसानो को मिलना चाहिए।

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