सुनिए साहेब! आपके मान-सम्मान में कोई कमी नहीं, लेकिन नौकरी तो दीजिए

अखिलेश अखिल


लखनऊ ट्रिब्यून दिल्ली ब्यूरो: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मान सम्मान में यह देश खड़ा है। तमाम विरोधाभाषों के बीच भी देश की जनता तमाम पक्ष विपक्षी नेताओं में तरजीह दे रही है। पसंद कर रही है और आगे भी चुनाव जिताने का वादा भी। अगर बहुत कुछ राजनितिक झमेला नहीं हुआ तो दूसरी दफा भी देश की जनता अपना सब कुछ न्योछावर करके और उनके मान सम्मान का ख्याल करके पीएम की गद्दी पर बैठा देगी। जनता जो चाहे। लेकिन पीएम मोदी को भी तो अब अपना वादा निभाना चाहिए। चार साल तक भले ही रोजगार का अकाल रहा हो इस साल तो रोजगार को लेकर जनता की नजरें बजट पर टिकी हुयी है। लोग टकटकी लगाए बैठे हैं कि इस बार पीएम साहेब जनता का मान सम्मान रखेंगे। रोजगार दिलाएंगे और युवाओं को खुश रखेंगे।

सब कोई जानता है कि बाकी सब ठीक है लेकिन रोजगार के मामले में मोदी सरकार सबसे पीछे है। झूठी साबित हो रही है। नई नौकरी पैदा करना मोदी सरकार की सबसे बड़ी चुनौती है बनी हुयी है। 2014 के लोकसभा चुनावों में नरेन्द्र मोदी ने सत्तारूढ़ मनमोहन सरकार के मुकाबले अपने कार्यकाल के दौरान प्रति वर्ष 1 करोड़ नई नौकरी पैदा करने का वादा किया था। वहीं प्रति वर्ष लगभग 1 करोड़ नए लोग देश में नौकरी लेने के लिए कतार में खड़े हो जाते हैं। इस चुनौती के चलते बजट 2018-19 मोदी सरकार के लिए आखिरी मौका है जहां वह इस समस्या का हल निकालने की कवायद कर सकते हैं। ऐसा लोगो की उम्मीद है। सरकार क्या करेगी ,भला कौन जाने।

गौरतलब है कि देश में नई नौकरी पैदा करने की रफ्तार मौजूदा सरकार के कार्यकाल के दौरान 2015 में निचले स्तर पर पहुंच गई जब महज 1 लाख 35 हजार नई नौकरियां पैदा की गई। जबकि 2014 के दौरान 4 लाख 21 हजार नौकरियां पैदा हुई थी और 2013 में यह आंकड़ा 4 लाख 19 हजार से अधिक रहा। यह आंकड़ा खुद केन्द्र सरकार के श्रम मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है.श्रम मंत्रालय की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान 2016 में बेरोजगारी का आंकड़ा उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। जबकि 2014 और 2013 के दौरान देश में बेरोजगारी 4.9 और 4.7 फीसदी क्रमश: रही। इन आंकड़ों के चलते हाल में हुए गुजरात चुनावों में सत्तारूढ़ बीजेपी को ग्रामीण इलाकों में वोट बैंक दरकता दिखाई दिया। यही वजह है कि जनता की समझ बन रही है कि इस बजट में सरकार कुछ नया काम करेगी ताकि रोजगार मिल सके।

जानकारों का दावा है कि मोदी सरकार देश में अपनी पहली रोजगार नीति का ऐलान कर सकती है। इस नीति के तहत सरकार की कोशिश एक विस्तृत रोडमैप के जरिए अलग-अलग सेक्टर में नए रोजगार के सृजन का रास्ता साफ करने का होगा। देश की जनता रोजगार के लिए जीभ निकाले भटक रही है। उम्मीद पर बैठी है लेकिन जिस तरह से केंद्र सरकार ने पांच साल से ज्यादा समय तक खाली रहने वाले सरकारी पदों को खत्म करने की दिशा में कदम आगे बढ़ाया है उससे और चिंता हो रही है। वित्त मंत्रालय ने एक आधिकारिक मेमोरेंडम में कहा है, ‘सभी मंत्रालयों और विभागों से कहा गया था कि पांच साल से ज्यादा समय से खाली पड़े पदों को खत्म करने के बारे में वे एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करें।

मंत्रालय ने कुछ दिनों पहले भेजे गए इस मेमोरेंडम कहा था, ‘सभी मंत्रालयों, विभागों के वित्तीय सलाहकारों और संयुक्त सचिवों से कहा गया है कि वे ऐसे पोस्ट की पहचान करें जो पांच साल से ज्यादा समय से खाली हैं और इस बारे में एक व्यापक रिपोर्ट जमा करें कि इन पदों को खत्म करने के लिए क्या कदम उठाए गए। सरकार क्या करेगी भला किसे पता। उसके मन की बात वही जाने। जनता के मन की बात जनता कह रही है -हे साहेब !अबकी बार नौकरी जरूर दियो। आपका मान सम्मान सलामत जो है।

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