सुप्रीम कोर्ट के बहाने सुलगी दलित राजनीति

मेरठ: जिस तरह से दलितों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरोध में सोमवार को हिंसक प्रदर्शन किया। उससे 2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर दलित राजनीति गर्मा गई है। इस हिंसक बवाल के पीछे खासकर दलित-मुस्लिम गठजोड़ की पैरवी करने वाले नेताओं का हाथ बताया जा रहा है।

देश के सामाजिक ताने-बाने में कई बदलाव तेजी से आ रहे हैं। आरक्षण को लेकर गुर्जर, जाट और पाटीदार समाज के आंदोलन में जमकर बवाल हुआ। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरोध में पूरे देश में दलित समाज भड़का हुआ है। इससे पूरे देश में दलित राजनीति सुलग उठी है। खासकर पश्चिम उत्तर प्रदेश में दलितों के विभिन्न जातियों के साथ हो रहे संघर्ष की घटनाएं भी ताजा हो गई हैं।

सपा-बसपा गठबंधन को भी बता रहे वजह

राजनीतिक विश्लेषक पुष्पेंद्र कुमार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आड़ में दलित राजनीति को सुलगाया जा रहा है। गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उप चुनावों में हुआ सपा-बसपा का गठबंधन भी इस बवाल के पीछे है। बसपा अपने बिखरे हुए दलित वोट बैंक को सहेजने की मुहिम चला रही है। खासकर भाजपा के पास गए अपने दलित वोट बैंक को पाने की जुगत में है। इस बवाल के पीछे भीम आर्मी और गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवाणी की गतिविधियां भी हैं। 2019 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए बसपा-सपा गठबंधन का आधार बनाने की कवायद भी इस बवाल के पीछे है।

सामाजिक समरसता पैदा करने में जुटा संघ

देश में बढ़ते जातिवाद को कम करने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुहिम चलाए हुए है। इसके लिए सामाजिक समरसता पर कार्य किया जा रहा है। आरएसएस के मेरठ प्रांत प्रचार प्रमुख अजय मित्तल का कहना है कि अखंड भारत का निर्माण तभी होगा, जब हिन्दु एक होंगे। जातिवाद के जहर को बाहर निकालकर सामाजिक समरसता को अपनाना होगा। संघ की यह मुहिम रंग ला रही है। संघ पूरे हिन्दू समाज को उसकी ताकत का अहसास करा रहा है।

जातियों के बीच कराए जा रहे संघर्ष

समाजसेवी रजनीश कौशल रज्जन ने बताया कि हालत के घटनाक्रमों पर गौर करें तो पता चलता है कि दलित समाज के लोगों का विभिन्न जातियों के साथ संघर्ष बढ़ रहा है। सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में दलितों का राजपूतों के साथ बड़ा संघर्ष हुआ। मेरठ में दलितों का जाटों, गुर्जरों, ब्राह्मणों और फिर त्यागी समाज के साथ संघर्ष हुआ। हाल में चंदसारा गांव में त्यागी और दलित समाज के बीच फायरिंग व पथराव हुआ। यह घटनाएं अचानक ही बढ़ गई है। एक योजना के तहत दलितों को भड़काया जा रहा है। आश्चर्यजनक तौर पर दलितों और मुस्लिमों के बीच संघर्ष की घटनाओं में कमी आई है। यह सीेधे-सीधे राजनीतिक गठजोड़ की वजह से हो रहा है।

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