सुप्रीम कोर्ट ने एमपी सरकार को लगाई फटकार, कहा- क्या दुष्कर्म की कीमत 6500 रुपये लगाई गई

नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने दुष्कर्म पीड़िताओं को मुआवजे के रूप में 6500 रुपये की राशि देने के मामले में मध्य प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से सवाल किया कि क्या दुष्कर्म की कीमत 6500 रुपये लगाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये चौंकाने वाला है कि मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल हैं, जिन्हें निर्भया फंड स्कीम के तहत केंद्र से सबसे ज्यादा राशि मिली है। लेकिन, राज्य सरकार ने रेप पीड़िताओं को सिर्फ 6 हजार से लेकर साढ़े 6 हजार रुपये आवंटित किए हैं।

मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से फाइल किए गए एफिडेविट पर सुनवाई करते हुए जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की बेंच ने कहा है कि आपके और इस एफिडेविट के अनुसार औसतन आप रेप पीड़िताओं को 6 हजार रुपये दे रहे हैं। क्या आप कोई चैरिटी कर रहे हैं? आप ऐसा कैसे कर सकते हैं।’ कोर्ट ने आगे कहा ‘मध्य प्रदेश के लिए आंकड़े शानदार है। राज्य में 1951 रेप पीड़िताएं हैं और आप इन्हें मात्र 6 हजार से लेकर साढ़े 6 हजार रुपये बांट रहे हैं। क्या यह अच्छा, सराहनीय है, ये क्या है?’

गौरतलब है कि 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में निर्भया के साथ गैंगरेप के बाद हुआ था। दरिंदगी के बाद निर्भया का निधन हो गया था। जिसके बाद सरकार ने ऐसी रेप पीड़िताओं की मदद के लिए ‘निर्भया फंड’ बनाया। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के मुताबिक, इस फंड के जरिए कई पीड़िताओं की मदद की जा चुकी हैं।

9 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक एफिडेविट देने को कहा था जिसमें रेप पीड़िताओं के लिए निर्भया फंड के तहत केंद्र से मिलने वाली राशि, रेप पीड़िताओं की संख्या और रेप पीड़िताओं को आवंटित की गई राशि का ब्योरा मांगा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि क्या राज्य सरकारों ने इस मामले में कोई जवाब दाखिल नहीं किया? ऐसे में हम ये अनुमान क्यों न लगाएं कि राज्य सरकारें महिलाओं की सुरक्षा को लेकर न ही चिंतित है और न ही गंभीर है।

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