सुप्रीम कोर्ट ने सेक्स वर्करों को राशन देने में देरी पर यूपी सरकार को फटकारा, पूछा- कोई चार हफ्ते बिना राशन कैसे रहेगा?

नई दिल्ली: सेक्स वर्करों की पहचान कर उन्हें राशन देने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार की खिंचाई की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूपी सरकार ने अभी तक ऐसे सेक्स वर्करों की पहचान सुनिश्चित नहीं कर पाई ताकि उन्हें राशन दिया जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप (यूपी सरकार) सिर्फ जुबानी बात कर रहे हैं। आप इस काम में देरी न करें। कोई चार हफ्ते बिना राशन कैसे जीवन चलाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव ने 29 सितंबर को तमाम राज्यों को निर्देश दिया था कि वह सेक्स वर्करों को पहचान का सबूत पेश करने के लिए बाध्य किए बिना ड्राई राशन उपलब्ध कराएं। अदालत ने तमाम राज्यों को निर्देश दिया था कि वे राष्ट्रीय एड्स कंट्रोल संगठन और लीगल सर्विस अथॉरिटी द्वारा पहचान किए गए सेक्स वर्करों को पहचान का सबूत दिखाने के लिए बाध्य न करें और उन्हें राशन दिया जाए। अदालत ने कहा था कि तमाम राज्य सरकारें चार हफ्ते में इस आदेश का पालन कर रिपोर्ट पेश करें।

यूपी सरकार के देरी पर SC ने जाहिर की नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान यूपी सरकार द्वारा पहचान सुनिश्चित करने में देरी को लेकर नाराजगी जाहिर की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपने अभी तक सेक्स वर्करों की पहचान नहीं की है, सिर्फ बातें कर रहे हैं। ये ऐसा मसला है जिसमें देरी नहीं की जानी चाहिए। चार हफ्ते में आपने कुछ नहीं किया। कोई आदमी चार हफ्ते बिना राशन के नहीं रह सकता। आप वेलफेयर स्टेट हैं और आपको हाशिये पर जो लोग हैं उनको हेल्प करना है आप इसमें देरी नहीं कर सकते।

SC ने महाराष्ट्र सरकार से पूछी नीति
कोर्ट सलाहकार ने अदालत को बताया कि महाराष्ट्र सरकार के हलफनामा में कहा गया है कि राज्य में आठ जिले का डाटा मिला है। 350 सेक्स वर्कर की पहचान हो पाई है। वहां अनाज मुहैया कराया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राशन के बंटवारे में एकरूपता नहीं है। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार से सवाल किया कि आप बताएं कि एक ऐसे शख्स को राशन देने के लिए आपके पास क्या नीति है। अदालत ने कहा कि राशन के बंटवारे में यूनिफर्म पॉलिसी होनी चाहिए। मणिपुर राज्य की ओर से कहा गया कि उनके यहां फंड की कमी है केंद्र सरकार को इसके लिए लिखा है।

ना उजागर हो पहचान: कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने तमाम राज्यों को सेक्स वर्करों को राशन मुहैया कराने केलिए चार हफ्ते का और वक्त दिया है। अदालत ने कहा कि उनकी पहचान सुनिश्चित कर राशन मुहैया कराया जाए। अदालत ने कहा कि पहचान के लिए नैशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन की मदद ली जाए। अदालत ने कहा कि सूखा राशन मुहैया कराया जाए और इस दौरान सेक्स वर्करों की पहचान उजागर न हो ये ध्यान रखा जाए। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की गई है कि कोरोना महामारी के कारण सेक्स वर्करों की स्थिति बेहद दयनीय है।

SC में दायर हुई थी याचिका
याचिका में कहा गया है कि देशभर में 9 लाख से ज्यादा सेक्स वर्करों को राशन कार्ड दिया जाए, साथ ही अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। अदालत ने राज्य सरकारों से कहा था कि वह इस मामले में विस्तार से रिपोर्ट पेश करें और बताएं कि सेक्स वर्करों को किस तरह से तमाम सुविधाएं दी जा सकती हैं और कैसे राशन कार्ड मुहैया कराया जा सकता है। अदालत ने कहा था कि हम जानते हैं कि सेक्स वर्करों के पास पहचान पत्र की कमी है और ऐसे में राशन दिया जाना सुनिश्चित किया जाए। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि सेक्स वर्करों को ड्राई अनाज दिया जाना चाहिए इसमें आपत्ति नहीं है। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया था कि कोरोना महामारी के कारण 96 फीसदी सेक्स वर्कर आमदनी का जरिया गंवा चुकी हैं। सेक्स वर्करों को जीवन का अधिकार है और गरिमा के साथ जीने का अधिकार है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उक्त आदेश पारित किया था।

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