सुरक्षा के दावों के बीच 26 दिन में आठवां रेल हादसा

नई दिल्ली: ट्रेनों की लेटलतीफी के लिए सेफ्टी इंतजामों पर फोकस करने के दावों के बीच कुशीनगर में 13 मासूमों की जान लेने वाला यह 26 दिन में आठवां रेल हादसा है। हालांकि 26 दिन में बिना चौकीदार वाले फाटक पर हुआ यह पहला हादसा है। लेकिन रेलवे के अपने ही आंकड़ों में कहा गया है कि इस वित्तीय साल यानी एक अप्रैल से लेकर अब तक यह आठवां हादसा है।

इन आठ हादसों में गुरुवार को बिना चौकीदार वाले फाटक पर हुआ हादसा तो है ही, इसके अलावा एक रेल हादसा ऐसी क्रासिंग पर भी हो चुका है, जहां फाटक भी था और चौकीदार भी। इन सबके बीच रेलवे का दावा है कि उसका फोकस सेफ्टी पर है और इसी वजह से रेल हादसे कम होते जा रहे हैं। कुछ दिन पहले रेलमंत्री पीयूष गोयल ने इस साल 31 मार्च को समाप्त हुए साल में 73 रेल हादसों का जिक्र करते हुए कहा था कि हाल के सालों में सबसे कम रेल हादसे हुए हैं।

महत्वपूर्ण है कि पिछले वित्तीय साल में ट्रेनों की लेटलतीफी बढ़कर 28 फीसदी तक पहुंच गई। इस लेटलतीफी के लिए भी रेलवे दावा करता रहा है कि चूंकि वह सेफ्टी पर फोकस कर रहा है, इसलिए ट्रेनें लेट हो रही हैं। रेल अधिकारी लगातार यही तर्क दे रहे हैं कि सेफ्टी के लिहाज से बड़ी मात्रा में पुरानी रेल लाइनों को बदला जा रहा है और इस वजह से ट्रेनें लेट हो रही हैं।

रेलवे के अधिकृत आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 में 104 और उससे पहले साल में 107 रेल हादसे हुए थे। पिछले साल जो 73 रेल हादसे हुए, उनमें से 10 बिना चौकीदार वाले फाटकों पर हुए थे, जबकि तीन हादसे चौकीदार वाले फाटकों पर हुए थे। इसी तरह से 2016-17 में भी इसी तरह से बिना चौकीदार वाले फाटकों पर 20 रेल हादसे हुए थे।

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