सुषमा स्वराज के राजनीतिक करियर में लिये गए ये ऐतिहासिक फैसले टर्निंग पॉइंट हुए साबित

नई दिल्ली: पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का मंगलवार रात यहां एम्स में निधन हो गया। वह 67 साल की थीं। सूत्रों के मुताबिक, सुषमा को दिल का दौरा पड़ने के बाद एम्स में भर्ती कराया गया था, लेकिन कुछ ही देर बार उनका निधन हो गया। जैसे यह खबर आई केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, प्रकाश जावडेकर और भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा एम्स पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुषमा के निधन पर शोक व्यक्त किया है और उनके कार्यकाल की तारीफ की है।

सुषमा स्वराज के 42 साल के राजनीतिक करियर में लिए कुछ ऐसे अहम मोड़ आए, जिन्होंने उन्हें नई ऊंचाईयों पर पहुंचा दिया। भारतीय जनता पार्टी में अस्सी के दशक में शामिल होने के बाद से सुषमा का राजनैतिक कद लगातार बढ़ता गया।। सुषमा स्वराज पर पार्टी का विश्वास इस कदर था कि 13 दिन की वाजपेयी सरकार में भी उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण पद मिला। अगली बार बीजेपी के सत्ता में आने पर एक बार फिर सुषमा को दूरसंचार मंत्रालय के साथ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय मिला। इस दौरान ऐतिहासिक फैसला लेते हुए सुषमा ने फिल्मी दुनिया को उद्योग घोषित कर दिया ताकि फिल्म बनाने वालों या फिल्म बनाने की चाह रखने वालों को भी बैंक से बाकायदा कर्ज मिल सके।

सुषमा स्वराज के राजनीतिक करियर ने साल 1999 में बड़ा मोड़ लिया और उन्हें कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ कर्नाटक की बेल्लारी सीट से चुनाव में उतारा गया। दरअसल बीजेपी ने बहुत सोच समझकर सोनिया गांधी के खिलाफ सुषमा स्वराज को उतारा था। इसके पीछे विदेशी बहू सोनिया गांधी के जवाब में भारतीय बेटी, बीजेपी की चुनाव रणनीति का हिस्सा था। हालांकि चुनाव में सुषमा को हार का सामना करना पड़ा. बीजेपी की रणनीति बेल्लारी के लोगों पर असर नहीं डाल सकी।

इसके बाद वर्ष 2000 में सुषमा स्वराज राज्य सभा सांसद चुनी गईं और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में फिर से सूचना प्रसारण मंत्री बनीं। इस दौरान न सिर्फ बीजेपी बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी सुषमा स्वराज का कद काफी बढ़ गया था। यही कारण था कि साल 2009 में उन्हें बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री उम्मीदवार माना जाने लगा था। हालांकि जब इन चुनावों में कांग्रेस फिर से सत्ता में आई तब सुषमा स्वराज विपक्ष की नेता के तौर पर चुनी गईं।

नेतृत्व क्षमता के लिहाजा से सुषमा स्वराज को बीजेपी में दूसरी पीढ़ी के सबसे दमदार राजनेताओं में गिना जाता रहा है। 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में उन्होंने विदिशा से जीत हासिल की। उनकी काबिलियत और पार्टी में उनके योगदान को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें विदेश मंत्री बनाया। इंदिरा गांधी के बाद सुषमा स्वराज दूसरी ऐसी महिला थीं, जिन्होंने विदेश मंत्री का पद संभाला था।

सुषमा स्वराज ने नवंबर 2018 में स्वास्थ्य कारणों से 2019 में लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया। हालांकि, उसके बाद भी वह विदेश मंत्री बनी रहीं। इस घोषणा के बाद सुषमा के पति और पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल ने ट्वीट किया और लिखा कि अब और चुनाव नहीं लड़ने के आपके फैसले के लिए थैंक यू। उन्होंने आगे कहा कि एक समय के बाद मिल्खा सिंह ने भी दौड़ना बंद कर दिया था। आप तो पिछले 41 साल से चुनाव लड़ रही हैं।

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