सूचना के अधिकार से हुआ खुलासा, छह वर्षों बाद भी नहीं हुआ जहरखुरानी सेल का गठन

लखनऊ: यूपी पुलिस ने उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए छह वर्ष के बाद भी जहरखुरानी सेल का गठन नहीं किया है। याची द्वारा सूचना के ​अधिकार में जानकारी मांगने पर पुलिस महानिदेशक के कार्यालय से प्राप्त जवाब से इसका खुलासा हुआ है।

प्रदेश के एटा जिले के निवासी कृष्णप्रभाकर उपाध्याय ने वर्ष 2012 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जनहित याचिका प्रस्तुत कर उच्च न्यायालय का ध्यान उत्तर प्रदेश में हो रहे जहरखुरानी की ओर आकर्षित किया था। उपाध्याय की इस याचिका पर निर्णय देते हुए उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने 27 सितम्बर 2012 को प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को इस अपराध की अलग से सेल गठित कर विवेचना किये जाने के आदेश दिये थे।

लगातार चार वर्षों तक सेल गठन की कोई प्रक्रिया ना देख तथा प्रदेश में जहरखुरानी अपराधों की बढ़ती संख्या को दृष्टिगत रख याची द्वारा वर्ष 2016 में इस बाबत सूचना के अधिकार के अंतर्गत सूचनाएं मांगी तो पुलिस महानिदेशक के कार्यालय से उपयुक्त जवाब नहीं प्राप्त हुआ। इस पर याची ने सूचना आयोग में अपील की, जहां इस विषय पर मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी द्वारा बीते 27 फरवरी को दिये आदेश के उपरान्त आज सोमवार को पुलिस महानिदेशक के कार्यालय द्वारा सूचना उपलब्ध करायी गयी है, उससे स्पष्ट है कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद पुलिस महानिदेशक के कार्यालय द्वारा बीते छह वर्षों में कभी भी जहरखुरानी के मामलों की विवेचना करने के लिए अलग से सेल का गठन किया ही नहीं गया।

बता दें कि वर्ष 2012 से प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार रही और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रहें। उनकी सरकार में पुलिस महानिदेशक के रूप में जावीद अहमद ने कार्यभार सम्भाला और कानून व्यवस्था को दुरूस्त रखने के दावे किये गये। फिर भी सेल का गठन नहीं हुआ। इसके बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। इस दौरान सुलखान सिंह जो तेजतर्रार पुलिस महानिदेशक माने गये, उन्होंने भी इस विषय में कुछ नहीं किया।

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