सेना ने मनाया कैप्टन मनोज पाण्डेय का 19वां शहीदी दिवस

लखनऊ। कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे का 19वां शहीदी दिवस छावनी में मनाया गया। इस दौरान सेना के पदाधिकरियों और जवानों ने उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
समारोह में 11वीं गोरखा राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर के सेनानायक ब्रिगेडियर पंकज सिंह ने सैन्यधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों व अन्य रैंकों की उपस्थिति में शहीद की प्रतिमा पर पुष्पचक्र अर्पित किया। इस अवसर पर शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय के पिता गोपीचंद पाण्डेय भी मौजूद थे।
25 जून 1975 को लखनऊ में जन्मे कप्टन मनोज पाण्डेय ने सात जून 1997 में भारतीय सेना की 11वीं गोरखा रेजिमेंट में कमीशन प्राप्त किया था। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान कैप्टन पाण्डेय ने 2-3 जुलाई 1999 को जम्मू-कश्मीर के बटालिक स्थित खालूबार पर कब्जा किया था। खालूबार से दुश्मनों को धूल चटाने की जिम्मेदारी कैप्टन व उनके सहसैनिकों पर ही थी। अपनी प्लाटून की कमान संभाल रहे कैप्टन मनोज पाण्डेय संकरे पहाड़ी रास्तों से गुजरते हुए दुश्मनों के करीब पहुंचकर उन पर हमला कर दिया। अपनी युद्ध कौशलता के साथ प्रारंम्भ में दुश्मन के तीन बंकरों को ध्वस्त कर दिया। इसी दौरान वह दुश्मन की गोलियों का शिकार होकर बुरी तरह जख्मी हो गए। इसके बावजूद भी यह बहादुर जांबाज दुश्मन के बंकर को ध्वस्त करने तक लड़ता रहा। दुश्मन के चौथे बंकर पर आक्रमण के दौरान कैप्टन मनोज पाण्डेय का ललाट बुरी तरह जख्मी हो गया फिर भी वह अपने सह सैनिकों को प्रेरित करते रहे। इस वीर जांबाज के अदम्य साहस से प्रेरित होकर सहसैनिकों ने भी दुश्मनों को मार गिराया और तीन जुलाई 1999 को वीरगति को प्राप्त हो गए। उनके इस अदम्य साहस, वीरतापूर्ण कारनामों व जीवन के सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें 15 अगस्त 1999 को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च वीरता पदक ‘परम वीर चक्र से अलंकृत किया गया।

 

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