सेल्फी से होने वाली मौतों में भी भारत पहले स्थान पर पहुंचा

दिल्ली ब्यूरो: इण्डिया के नाम वैसे कई रिकॉर्ड है। कई मामलों में भारत दुनिया में अव्वल है। अब भारत के नाम एक और रिकॉर्ड कायम हुआ है। यह रिकॉर्ड है सेल्फी के दौरान होने वाली मौत को लेकर। खबर है कि सेल्फी के कारन हो रही मौतों में भी भारत का स्थान दुनिया में पहले स्थान पर आ गया है।

बीते दिनों दुनिया भर में सेल्फी लेने के दौरान होने वाली मौतों के अध्ययन के बाद सामने आई रिपोर्ट में कहा गया कि भारत इस मामले में पूरी दुनिया में अव्वल है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली और आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं की ओर से किए गए इस अध्ययन में कहा गया था कि अक्तूबर 2011 से नवंबर 2017 के बीच पूरी दुनिया में ऐसी घटनाओं में जो 259 मौतें हुई थीं उनमें से 158 भारत में हुई थीं। उसके बाद भी यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है।

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इस मामले की गंभीरता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि सेल्फी लेने के दौरान होने वाली मौतों के मामले में दूसरे स्थान पर रहे रूस में इस दौरान महज 16 और तीसरे स्थान पर रहे अमेरिका में 14 लोगों की मौत हुई थी। बीते सात वर्षों के दौरान ऐसे मामले साल दर साल बढ़ रहे हैं। मिसाल के तौर पर वर्ष 2011 में भारत में सेल्फी लेने के दौरान महज तीन लोगों की मौत हुर्ई थी. वर्ष 2013 में यह तादाद महज दो थी। लेकिन 2014 में यह 13, 2015 में 50 और 2016 में यह 98 तक पहुंच गई।अगले साल यानि वर्ष 2017 में ऐसी घटनाओं में 93 मौतें हुईं। मोटे अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2018 में भी मौतों का आंकड़ा 105 तक पहुंच गया। बीते एक साल के दौरान अकेले पश्चिम बंगाल में ऐसी घटनाओं में कम से कम 10 युवकों की मौत हो गई।

जर्नल ऑफ फेमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर में छपी उक्त अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि सेल्फी लेने के दौरान सबसे ज्यादा मौतें झील, नदी या समुद्र में डूबने के दौरान हुईं। उसके बाद चलती ट्रेन के सामने या हिंसक जानवरों के साथ सेल्फी लेने के दौरान हुई मौतों का स्थान है। शोधकर्ताओं का कहना है कि देश में 30 साल से कम उम्र के युवक-युवतियों की आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा होना भी इन मौतों की एक बड़ी वजह है। मरने वालों में से 50 फीसदी यानि आधे लोग 20 से 29 आयुवर्ग के थे।

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देश के कुछ राज्यों में युवाओं में बढ़ते इस जानलेवा क्रेज पर अंकुश लगाने के लिए कुछ उपाय किए गए हैं। लेकिन वह नाकाफी ही साबित हो रहे हैं. मिसाल के तौर पर मुंबई के बांद्रा इलाके में जनवरी 2016 में तीन लड़कियों के डूब जाने के बाद मुंबई पुलिस ने समुद्र तटों व किलों के पास 16 नो सेल्फी जोनों की शिनाख्त की थी और वहां चेतावनी वाले बोर्ड लगाए थे। जुलाई 2017 में महाराष्ट्र सरकार ने 29 जगहों को सेल्फी के लिए खतरनाक करार दिया था। उसी साल अक्तूबर में कर्नाटक सरकार ने भी खतरनाक जगहों पर सेल्फी लेने के खतरों से लोगों को आगाह करने के लिए जागरूकता अभियान चलाया था। अब इन घटनाओं से चिंतित केंद्र सरकार ने तमाम राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से पर्यटकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने को कहा है। इनमें खतरनाक स्थानों की पहचान कर वहां चेतावनी वाले बोर्ड लगाना और ज्यादा खतरे वाली जगह पर बाड़ लगाना जैसे उपाय शामिल हैं।

युवा वर्ग में नए और खतरनाक स्थानों पर सेल्फी लेने की बढ़ती होड़ और ऐसी घटनाओं की लगातार बढ़ती तादाद से चिंतित केंद्र सरकार ने अब पर्यटकों की सुरक्षा के लिहाज से तमाम राज्य सरकारों को पर्यटन केंद्रों पर ऐसे हादसों के प्रति संवेदनशील स्थानों की पहचान करने और वहां सुरक्षा संकेत लगाने की सलाह दी है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने लोकसभा में इसकी जानकारी दी।

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