स्किन बैंक से 80 फीसदी से अधिक जले लोगों को बचाया जा सकता है: डॉ आर के मिश्रा

लखनऊ ब्यूरो। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एसोसिएशन ऑफ़ प्लास्टिक सर्जन्स ऑफ़ इंडिया दिवसीय 53 वां वार्षिक सेमिनार 19नवम्बर को प्रारम्भ हो गया है। सेमिनार में देश व विदेश के 700 से अधिक प्लास्टिक सर्जन शामिल हुए है। सेमिनार में वर्न सर्जरी से सम्बन्धित ७० से अधिक विधाओं पर देश व् विदेश से आये सर्जन अपना अनुभव शेयर करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्घाटन केजीऍमयू के पूर्व प्रोफेसर आर बी शाही होंगे, प्लास्टिक सर्जन है।

एसोसिएशन ऑफ़ प्लास्टिक सर्जन्स ऑफ़ इंडिया के आयोजक सचिव डॉ. आर के मिश्रा ने प्रेस वार्ता में बताया कि एसोसिएशन का ५३ वां सेमिनार 19 से शुरू हो गया है।जो 25 नवम्बर तक चलेगा।

एसोसिएशन ऑफ़ प्लास्टिक सर्जन्स ऑफ़ इंडिया दिवसीय 53 वां वार्षिक सेमिनार शुरू

मिश्रा ने बताया कि 19 व 20नवम्बर को केजीऍमयू में कटे फटे ओठ और उससे जुड़ी सर्जरी पर ट्रेनिंग कोर्स शुरू हो गया है।

मिश्रा ने बताया कि 21 नवम्बर को फैज़ाबाद रोड पर गोल्डेन ब्लूज़म में प्लास्टिक सर्जरी से सबंधित 70 प्रकार के संचालन प्रक्रिया वीडियो के माध्यम दिखाया जायेगा। 22 नवम्बर को सीऍमई प्रोग्राम आयोजित किया गया है।

23 नवम्बर को गोमती नगर के सहारा शहर में क्रिकेट मैच का भी आयोजन किया गया है। 24 व 25 नवम्बर को भी बर्न से ट्रेजडी को ध्यान में रख कर सेमिनार में आये देश व विदेश से सीनियर सर्जन अपना अनुभव साझा करेंगे।

मिश्रा ने बताया कि देश में अभी कुछ जगह पर ब्लड बैंक की तरह स्किन बैंक बन गए है । उत्तर भारत में अभी कोई स्किन बैंक नहीं है। 80 फीसदी जले लोगों को अभी बचाना मुश्किल होता है। स्किन बैंक होता, तो 40 फीसदी लोगों को बचाया जा सकता है। स्किन बैंक से बर्न लोगों को स्किन लगाने से इन्फेक्शन कम हो जाते है। जिससे उनको बचाया जा सकता है। स्किन बैंक के लिए लोगों को जागरूक करने की जरुरत होती है। इसको नेत्र दान से जोड़ने की सख्त आवश्यकता है।

मिश्रा ने बताया कि अब सी टी स्कैन और एक्स रे की तरह 3D प्रिंटिंग आ गया है। जिससे कही भी कुछ हुआ हो, उसको हाथ से छू कर महसूस किया जा सकता है।

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