‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के अनावरण के बाद बोले प्रधानमंत्री, कहा- देश ने अपने लिए रचा इतिहास देश

नई दिल्ली: आजाद भारत के पहले गृह मंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 143वीं जयंती आज (31 अक्टूबर) पूरे देश भर में मनाई जा रही है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज उनकी आदम कद प्रतिमा का अनावरण किया। इस प्रतिमा का नाम ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ रखा गया। प्रतिमा अनावरण के साथ ही यह दर्शनीय स्थल आम लोगों के लिए खोल दिया गया। सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची मूर्ति को विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है। इस प्रतिमा को बनाने में करीब 3000 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

स्टैच्यू का अनावरण नजारा गणतंत्र दिवस जैसा दिखा। वायु सेना के लड़ाकू विमान फ्लाइ पास्ट किया और हवाई करतब दिखाए। जबकि सेना,नौसेना और वायुसेना के बैंड राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत संगीत पेश किए। इसके अलावा पंजाब, असम, मिजोरम और गुजरात के लोक कलाकारों का नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा।

इस मौके पर पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, देश ने अपने लिए इतिहास रचा। आज के दिन को इतिहास से कोई नहीं मिटा पाएगा। आज जो हुआ वह इतिहास में हमेशा दर्ज हो गया। कभी नहीं सोचा था अनावरण करने का मौका मिलेगा। मैं भाग्यशाली हूं कि सरदार साहब की इस स्टैच्यू को देश को समर्पित किया। यह देशवासियों के लिए ऐतिहासिक और प्ररेणादायक अवसर है। आज जी भरकर बहुत कुछ कहने का मन कर रहा है। पीएम ने कहा, यह एक परियोजना है जिसे हमने उस समय के बारे में सोचा था जब मैं गुजरात के मुख्यमंत्री थे। Statue Of Unity बनाने के लिए,पूरे भारत के लाखों किसान एक साथ आए। अपने उपकरण दिए। मिट्टी के हिस्से दिए। इस तरह यह जन आंदोलन बन गया।

पीएम मोदी ने कहा, जब बेटे पर मां हाथ रखती है तो उसकी ताकत बढ़ जाती है। अभिनंदन के लिए गुजरात के लोगों का अभिनंदन। मूर्ति बनवाने के लिए जगह की बहुत जांच पड़ताल की। मां भारती साढ़े पांच सौ रियासतों में बटे हुए थे। सरदार पटेल ने मां भारती को एक कर दिया। निराशा के दौर में सरदार पटेल आशा की किरण बने। सरदार पटेल ने कमजोरी को ताकत बनाकर दिखाया। पीएम मोदी ने कहा, सरदार साहब के आह्वान पर देश के सैकड़ों रजवाड़े ने त्याग की मिसाल कायम की थी। हमें इस त्याग को भी नहीं भूलना चाहिए। आज भारत अपनी शर्तों पर दुनिया से संवाद कर रहा है। सरदार साहब ने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई।

पीएम मोदी ने कहा, कच्छ से कोहिमा तक, करगिल से कन्याकुमारी तक आज अगर बेरोकटोक हम जा पा रहे हैं तो ये सरदार साहब की वजह से, उनके संकल्प से ही संभव हो पाया है। सरदार पटेल ने 5 जुलाई, 1947 को रियासतों को संबोधित करते हुए कहा था कि- विदेशी आक्रांताओं के सामने हमारे आपसी झगड़े, आपसी दुश्मनी, वैर का भाव, हमारी हार की बड़ी वजह थी। अब हमें इस गलती को नहीं दोहराना है और न ही दोबारा किसी का गुलाम होना है।

पीएम मोदी ने कहा, आज जब धरती से लेकर आसमान तक सरदार साहब का अभिषेक हो रहा है, तब भारत ने न सिर्फ अपने लिए एक नया इतिहास रचा है, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा का गगनचुम्बी आधार भी रखा है। कच्छ से कोहिमा तक, करगिल से कन्याकुमारी तक आज अगर बेरोकटोक हम जा पा रहे हैं तो ये सरदार साहब की वजह से, उनके संकल्प से ही संभव हो पाया है। सरदार साहब ने संकल्प न लिया होता, तो आज गीर के शेर को देखने के लिए, सोमनाथ मंदिर में पूजा करने के लिए और हैदराबाद चार मीनार को देखने के लिए हमें वीज़ा लेना पड़ता। सरदार साहब का संकल्प न होता, तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक की सीधी ट्रेन की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।

पीएम मोदी ने कहा, देश के लोकतंत्र से सामान्य जन को जोड़ने के लिए सरदार साहब प्रतिपल समर्पित रहे। ये प्रतिमा, सरदार पटेल के उसी प्रण, प्रतिभा, पुरुषार्थ और परमार्थ की भावना का प्रकटीकरण है। ये प्रतिमा भारत के अस्तित्व पर सवाल उठाने वालों को ये याद दिलाने के लिए है कि ये राष्ट्र शाश्वत था, शाश्वत है और शाश्वत रहेगा। हमारे इंजीनियरिंग और तकनीकि सामर्थ्य का भी प्रतीक है। बीते करीब साढ़े तीन वर्षों में हर रोज़ कामगारों ने, शिल्पकारों ने मिशन मोड पर काम किया है। राम सुतार जी की अगुवाई में देश के अद्भुत शिल्पकारों की टीम ने कला के इस गौरवशाली स्मारक को पूरा किया है। करोड़ों भारतीयों की तरह तब मेरे मन में एक ही भावना थी कि जिस व्यक्ति ने देश को एक करने के लिए इतना बड़ा पुरुषार्थ किया हो, उसको वो सम्मान अवश्य मिलना चाहिए जिसका वो हकदार है।

पीएम मोदी ने कहा, सरदार पटेल का ये स्मारक उनके प्रति करोड़ों भारतीयों के सम्मान, हमारे सामर्थ्य, का प्रतीक तो है ही, ये देश की अर्थव्यवस्था, रोज़गार निर्माण का भी महत्वपूर्ण स्थान होने वाला है। इससे हज़ारों आदिवासी बहन-भाइयों को हर वर्ष सीधा रोज़गार मिलने वाला है। सरदार पटेल का ये स्मारक उनके प्रति करोड़ों भारतीयों के सम्मान, हमारे सामर्थ्य, का प्रतीक तो है ही, ये देश की अर्थव्यवस्था, रोज़गार निर्माण का भी महत्वपूर्ण स्थान होने वाला है। इससे हज़ारों आदिवासी बहन-भाइयों को हर वर्ष सीधा रोज़गार मिलने वाला है। सरदार साहब के दर्शन करने आने वाले टूरिस्ट सरदार सरोवर डैम, सतपुड़ा और विंध्य के पर्वतों के दर्शन भी कर पाएंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सरदार वल्लभ भाई पटेल के सम्मान में बनी 182 मीटर ऊंची ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ देश को समर्पित की।

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