स्थानीय भाषाओं के उत्थान के लिए काम करेगा संघ

लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) भारत की विविध भाषाओं और बोलियों के संरक्षण व संवर्धन के लिए काम करेगा। इस संबंध में संघ ने नागपुर में संपन्न अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में प्रस्ताव भी पास किया है। संघ विश्व की विभिन्न भाषाओं को सीखने की समर्थक है। हमारी संस्कृति के संवाहक सभी भाषाओं के संरक्षण व संवर्धन को परम-आवश्यक मानती है। यह बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अवध प्रान्त के सह प्रान्त कार्यवाह प्रशान्त भाटिया ने कही। वह विश्व संवाद केन्द्ग जियामऊ के अधीश सभागार में मंगलवार को आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे।

संघ ने समाज के साथ-साथ केंद्र व प्रान्तीय सरकारों से भी भाषाओं एवं बोलियों के संरक्षण करने का आह्वाहन किया है। उन्होंने कहा कि आज देश की अनेक भाषाएं और बोलियां विलुप्त हो चुकी हैं। कई बोलियों का अस्तित्व संकट में है। इसलिए देश की विविध भाषाओं एवं बोलियों के संरक्षण व संवर्धन के समुचित प्रयास किये जाना अत्यन्त आवश्यक है।

एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रशान्त भाटिया ने कहा कि भारत की 4० बोलियां विलोपन की कगार पर हैं। भारत में 197 भारतीय भाषाएं और बोलियां संकट में हैं। विगत 5० वर्षों में 25० भाषाएं या बोेलियां पूर्णत: विलोपित हो चुकी हैं। 2००4 में किये गये एक वैश्विक आकलन में तो यहां तक कह दिया गया कि वर्ष 2०5० तक आज चलन में विद्यमान भाषाओं में से 9० प्रतिशत भाषाएं और बोलियां विलुप्त हो सकती हैं। ऐसा अनुमान है कि प्रतिवर्ष 1० भाषाएं अथवा बोलियां विलु’ हो सकती हैं।

सह प्रान्त कार्यवाह ने बताया कि आज विश्व में 6,००० भाषाएं व बोलियां बोली जा रही हैं जिनमें से आधे अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत हैं। यह भी अनुमान है कि मानव सभ्यता के इतिहास में 3०,००० भाषाएं विलुप्त हो गयी हैं। संघ ने स्वयंसेवकों सहित समस्त समाज को अपने पारिवारिक जीवन में वार्तालाप व दैनिक चर्या में मातृभाषा को प्राथमिका देने की अपील की है।

शासकीय कार्यों में भी भारतीय भाषाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देशभर में प्राथमिक शिक्षण मातृभाषा में करने की मांग की है। अवध प्रान्त के प्रचार प्रमुख डा. अशोक दुबे ने कहा कि संघ अवध प्रान्त में बोली जाने वाली भाषा अवधी और बैसवारा के उत्थान के लिए काम करेगा। इस मौके पर क्षेत्र प्रचार प्रमुख राजेन्द्ग सक्सेना भी उपस्थित थे।

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