स्पर्म की होली से शर्मशार दिल्ली 

अखिलेश अखिल 

दिल्ली अब पहले वाली नहीं रही। तहजीबों का यह शहर अब बदतमीजों का शहर बनता जा रहा है। पहले इसी दिल्ली में अंग से अंग सट  जाने से तलवाएवं खिंच जाती थी। महिलाओं की इज्जत सर्वोपरि थी। तब थी यह ग़ालिब की दिल्ली। लेकिन अब वह सब कुछ नहीं रहा। अब दिल्ली का मिजाज बदल गया है। अब यहां वह पार्टियां होती दिखती है जिसकी कल्पना नहीं की गयी थी। कामुकता ,मादकता से भरपूर दिल्ली अब सम्बन्धो को नहीं जीती। अब यहाँ हर चीज में कामुकता है। बर्जनाएँ टूट गयी है और सम्बन्धो की तिलांजलि हो गयी है। भाई बहन  के रिश्ते भी तार तार होते दिख रहे हैं।दिल्ली शर्मशार है। ऐसा कभी नहीं हुआ जो अब दिख रहा है।

संस्कृति और भाई चारे का त्यौहार होली अब दिल्ली वालों को शर्मशार कर रहा है। खबर के मुताविक दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक छात्रा पर ‘स्पर्म से भरा’ गुब्बारा फेंकने के खिलाफ जीसस एंड मेरी कॉलेज की छात्राओं और शिक्षकों ने दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर पर प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बहार लड़के लडकियां पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज करा दी है कि महिलाओं के साथ जो रहा है ,ऐसा कभी नहीं हुआ। बता दें कि  एक छात्रा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया था कि अज्ञात लोगों के एक समूह ने उसके ऊपर ‘वीर्य से भरा’ गुब्बारा फेंका था। उसके बाद पुलिस ने मामले को संज्ञान में लिया था और बयान जारी किया था कि वह लड़की से संपर्क करने की कोशिश कर रही है जिससे कि जांच शुरू हो सके। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था, ‘हमें अभी तक इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है।’ अपने ऊपर स्पर्म फेंके जाने का दावा करने वाली छात्रा ने गुरुवार को कहा, मैं बस में थी बाहर से कुछ लोगों का ग्रुप ने फेंका। शर्मिंदा नहीं थी लेकिन यह घृणित था। यह देखकर लगा कि मानवता कितना गिर गया है। अजनबी के होने के नाते जब आप मेरे ऊपर स्पर्म के जैसा कुछ फेकेंगे तो यह मेरी प्रतिष्ठा के खिलाफ होगा, यह स्वीकार्य नहीं होगा।
नॉर्थईस्ट की रहने वाली लड़की ने 24 फरवरी को अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा था, ‘मैं अमर कालोनी मार्केट में अपने एक मित्र के साथ एक कैफे में दोपहर भोज के लिए गई थी। जब मैं रिक्शे में बैठकर वापस आ रही थी तो कुछ लोग आए और मेरी तरफ तरल पदार्थ से भरा गुब्बारा फेंक दिया जो मेरे कूल्हे से टकराया और यह फट गया तथा इसमें भरी चीज के अंश मेरी ड्रेस पर फैल गए।’ उसने कहा, ‘मेरी काली लैगिंग पर सफेद निशान पड़ गए…मैं अनुमान नहीं लगा सकी कि असल में यह क्या था। जब मैं हॉस्टल पहुंची तो मैंने अपनी एक अन्य दोस्त को स्पर्म से भरे गुब्बारे फेंके जाने की बात करते सुना।’
होली के पहले आई इस खबर ने होली के बदलते चरित्र को लेकर चिंता पैदा कर दी है। लगता है कि हम पाषाण युग में जा रहे हैं। कुंठा की ऐसी पराकाष्ठा और बदतमीजी शायद ही पहले कभी देखी  गयी हो। छात्राओं के प्रदर्शन के बाद पुलिस इस पर क्या कार्रवाई करती है ,यह कोई विषयन नहीं। लेकिन जिस तरह का समाज निर्माण होता दिख रहा है वह चिंता पैदा करती है। स्पर्म की होली मानव समाज पर ना सिर्फ धब्बा है वल्कि समाज के लिए एक आपराधिक कृत्य भी।

इस बारे में पुलिस ने कहा कि मामला उसके संज्ञान में आया है और वह लड़की से संपर्क करने की कोशिश कर रही है जिससे कि जांच शुरू हो सके. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘हमें अभी तक इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है.’’

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