हनुमान मंदिर में पूजा कर उलेमा के निशाने पर आए मोहसिन रजा

सहारनपुर ब्यूरो। प्रदेश सरकार में एकमात्र मुस्लिम मंत्री मोहसिन रजा हनुमान जयंती पर मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना करने के बाद देवबंद उलेमा के निशाने पर आ गए हैं। उलेमा ने मोहसिन रजा द्वारा पूजा अर्चना किए जाने को सियासी ढोंग करार दिया है। उलेमा का कहना है कि इस्लाम मजहब के किसी भी मूर्ति की पूजा करने पर रोक है। इसलिए मूर्ति पूजा करने वालों को तौबा कर दोबारा कलमा पढऩा चाहिए।

हनुमान जयंती के अवसर पर प्रदेश सरकार में एकमात्र मुस्लिम मंत्री मोहसिन रजा ने हनुमान मंदिर पहुंचकर अपने बच्चों के साथ पूजा पाठ की थी। इस पर देवबंदी उलेमा ने कहा कि मोहसिन रजा जैसे लोग अपनी कुर्सी बचाए रखने के लिए अपने रब के साथ शिर्क करने से भी नहीं चूक रहे हैं। उलेमा ने साफ कहा कि मुल्क में हर तहजीब और मजहब का सम्मान करना देश के नागरिकों का फर्ज है। लेकिन अपनी मजहबी लीक से हटकर दूसरें मजहब के अरकान (क्रियाएं) करना जायज नहीं है। दारुल उलूम निस्वा के मोहतमिम मौलाना अब्दुल लतीफ कासमी ने कहा कि मोहसिन रजा जैसे सियासी लोगों का इस्लाम मजहब से दूर का भी रिश्ता नहीं होता। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अपनी कुर्सी सलामत रखने के लिए अपने मजहब को भी दरकिनार करने से नहीं चूकते।

फतवा ऑन मोबाइल के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि दूसरे मजहब से मोहब्बत जताने के लिए अपने मजहब के अकीदे के खिलाफ जाकर पूजा पाठ करना गलत है। चाहे यह काम कोई मुसलमान करें या कोई हिंदू। मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि मोहसिन रजा जैसे लोग इस तरह का कार्य कर सियासी खेल खेलते हैं। उन्होंने कहा कि हर मजहब का सम्मान करना चाहिए और मजहब के इंसान के साथ अच्छा सलूक करने की तालीम सभी मजहब देते हैं। उन्होंने रजा से सवाल किया कि वह अपनी इन क्रियाओं के चलते कल अल्लाह की अदालत में क्या जवाब देंगे। इसलिए उन्हें तौबा कर इस्लाम मजहब के अकीदे पर चलना चाहिए।

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