हमने सचिन-विराट के शतक देखे, अब पेट्रोल-डीजल के देख रहे हैं: सीएम ठाकरे

मुंबई: पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों ने जहां आम लोगों के लिए सिर में दर्द पैदा कर दिया है, वहीं विरोधी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। अब तेल की कीमतों को लेकर महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने पीएम मोदी और उनकी सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने रविवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि हमने विराट कोहली-सचिन तेंदुलकर के शतक देखे हैं, लेकिन अब हम पेट्रोल-डीजल शतक देख रहे हैं। मालूम हो कि देश के कई राज्यों में पेट्रोल की कीमत 100 रु प्रति लीटर का आंकड़ा पार कर चुकी है तो वहीं कई शहरों में तेल की कीमत 100 रु प्रति लीटर के पहुंचने के करीब है।

ताजा स्थिति की बात करें तो आज लगातार दूसरे दिन भी पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई इजाफा नहीं हुआ है। आखिरी बढ़ोतरी शनिवार को हुई थी, मुंबई में पेट्रोल 97.57 रुपये प्रति लीटर और डीजल 88.60 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है, खास बात ये है कि दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता, देश के चार बड़े महानगरों में सबसे महंगा पेट्रोल मुंबई में ही है।

तेल के बढ़ते हुए दामों पर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी सफाई पेश की थी। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ईंधन की कीमत बढ़ने के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला अंतर्राष्ट्रीय बाजार ने ईंधन का उत्पादन कम कर दिया है और दूसरा अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए विनिर्माण देश कम ईंधन का उत्पादन कर रहे हैं। इससे उपभोक्ता देश त्रस्त हैं। वहीं उन्होंने कहा कि हम लगातार सऊदी अरब ने तेल निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) और रूस समेत सहयोगी देशों (ओपेक प्लस) से आग्रह करते रहे हैं कि ऐसा नहीं होना चाहिए। हमें उम्मीद है कि बदलाव होगा।

मंत्री प्रधान ने एक मीडिया चैनल से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकार ने ऑयल बांड्स बिना किसी बजटरी सपोर्ट के जारी किए थे और उसका बड़ा असर कीमतों में दिखाई दे रहा है। तेल कंपनियों को अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा ऑयल बांड्स की ब्याज अदायगी में हो रहा है और उसका असर कीमतों पर नजर आ रहा है। जबकि इससे पहले पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों पर चिंता व्यक्त करते हुए कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने पीएम मोदी को पत्र लिखा था। उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि इन बढ़ोतरी को वापस लें और हमारे मध्यम और वेतनभोगी वर्ग, हमारे किसानों और गरीबों और हमारे साथी सैनिकों को लाभ दें, यह कीमतें ‘ऐतिहासिक एवं अव्यावहारिक” हैं।

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