हमारा लक्ष्य है कि सेनाओं की जरूरत का सामान भारत में ही विकसित हो: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

नई दिल्ली: सरकार की नीतियों से रक्षा क्षेत्र में देश की ‘आत्म-निर्भरता’ का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को कहा कि हमारा लक्ष्य है कि सेनाओं की जरूरत का सामान भारत में ही विकसित हो तथा भारत में ही निर्मित हो। संसद के बजट सत्र के पहले दिन दोनों सदनों की सुयक्त बैठक में अपने अभिभाषण में कोविंद ने यह भी कहा कि देश में अंतरिक्ष को निजी क्षेत्र के लिए खोलकर संभावनाओं का अनंत आकाश उपलब्ध करा दिया गया है और पिछले साल भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इन-स्पेस का गठन ऐसा ही एक प्रमुख कदम है।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘मेरी सरकार देश की सुरक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित होकर काम कर रही है। सरकार की नीतियों की वजह से रक्षा क्षेत्र में, विशेषकर रक्षा उत्पादन में, देश की आत्म-निर्भरता लगातार बढ़ रही है।” उन्होंने कहा कि तेजी से विकसित हो रही ड्रोन प्रौद्योगिकी और इससे जुड़ी संभावनाओं को लेकर भी सरकार सजग और सक्रिय है। कोविंद ने कहा, ‘‘इस दिशा में सरकार ने सरलीकृत ड्रोन नियम, 2021 को अधिसूचित किया है, और ड्रोन व ड्रोन-कलपुर्ज़ों के देश में निर्माण के लिए उत्पादन से संबंधित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना भी शुरू की है। इससे देश को भविष्य की इस महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी में अपनी स्थिति को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।”

कोविंद ने कहा कि 2020-21 में सैन्य बलों के आधुनिकीकरण के लिए जो भी स्वीकृतियां प्रदान की गईं, उनमें 87 प्रतिशत उत्पादों में ‘मेक इन इंडिया’ को प्राथमिकता दी गई। इसी प्रकार 2020-21 में 98 प्रतिशत उपकरणों से जुड़े अनुबंधों में ‘मेक इन इंडिया’ को प्राथमिकता दी गयी है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सेनाओं ने 209 ऐसे साजो-सामान की सूची भी जारी की है जिन्हें अब विदेश से नहीं खरीदा जाएगा। रक्षा उपक्रमों द्वारा 2800 से ज्यादा ऐसे उपकरणों की सूची ज़ारी की जा चुकी है जिनका देश में ही निर्माण किया जायेगा।”

राष्ट्रपति ने कहा कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ 83 तेजस हल्के लड़ाकू विमान (एचएलए)के निर्माण के लिए अनुबंध किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने आयुध कारखानों को रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों का रूप देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा रक्षा क्षेत्र में निजी सेक्टर और स्टार्ट-अप उद्यमों को तेज़ी से बढ़ावा देने के लिए भी सरकार प्रतिबद्ध है। कोविंद ने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य है कि हमारी सेनाओं की जरूरत का सामान भारत में ही विकसित हो तथा भारत में ही निर्मित हो।”

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