हमारे पूर्वज क्यों सुबह उठकर पीते थे तांबे के बर्तन में पानी?

नई दिल्ली: हमारे बुज़ुर्ग सुबह उठकर सबसे पहले तांबे के गिलास या लुटिया में रखा हुआ पानी पीते थे। इस पानी को वे रात को ही भरकर रख लेते थे। सवाल है कि वे कांच या स्टील नहीं, सिर्फ तांबे के बरतन में ही पानी क्यों पिया करते थे। बता दें कि आयुर्वेद में ऐसी मान्यता है कि तांबे के बरतन का पानी तीनों दोषों, वात, कफ और पित्त को बैलेंस करता है। इस पानी का पूरी तरह से लाभ तभी मिलता है, जब तांबे के बरतन में कम से कम 8 घंटे तक पानी रखा रहे।

इसीलिए लोग रात को तांबे के बरतन में पानी भरकर सोया करते थे और सुबह उठकर सबसे पहले उसे पिया करते थे। अब साइंस ने भी इस पानी के कई फायदों के बारे में बताया है। यह पानी पेट, लिवर और किडनी को साफ करता है। इसमें ऐसे गुण मौजूद होते हैं, जो पेट को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टिरिया को मार देते हैं, जिस वजह से पेट में कभी भी अल्सर और इंफ्केशन नहीं होता। इसके साथ ही तांबा पेट संबंधी बीमारियों, जैसे एसिडिटी और गैस से भी बचाता है। तांबे में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज़ दर्द से राहत दिलाती है, खासकर जोड़ों के।

इसीलिए इस पानी को अर्थराइटिस और जोड़ों के दर्द से परेशान लोगों को ज़रूर पीना चाहिए। तांबा हड्डियों और इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाता है। तांबे में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स चेहरे की फाइन लाइन्स और झाइयों को खत्म करता है। यह फाइन लाइन्स को बढ़ाने वाले सबसे बड़े कारण यानी फ्री रैडिकल्स से बचाकर स्किन पर एक सुरक्षा लेयर बनाता है, जिस वजह से आप लंबे समय तक जवां रहते हैं। अगर आपको जल्दी वज़न कम करना है, तो भी तांबे के बरतन का पानी पिएं। पानी पाचन तंत्र को बेहतर करके बुरे फैट को शरीर से बाहर निकालता है।

तांबे में मौजूद एंटी-वाइरल, एंटी- बैक्टिरियल और एंटी-इंफ्लेटरी प्रॉपर्टीज़ किसी भी तरह के घाव और जख्म को जल्दी भरने में मदद करते हैं। यह इम्यून सिस्टम को स्ट्रॉंग कर नये सेल्स बनाता है, जिस वजह से घाव जल्दी भर जाते हैं। तांबे का पानी अंदरूनी घाव को ठीक करता है, खासकर पेट के।

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