हम है ‘गोदी मीडिया’ चाहे जो लिखवा लो

अखिलेश अखिल

गोदी मीडिया की कलई खुल गयी। उस राजनीति की भी कलई खुली जो पिछले कुछ सालों से जनता के मिजाज को लगातार बदल रही थी और सब कुछ सुहावना दिख रहा था। लेकिन राजनीति को छोड़िये, गोदी मीडिया ने पूरी पत्रकारिता को ही नंगा कर दिया। हालिया कोबरा पोस्ट का ऑपरेशन 136 ने वह सब दिखा दिया जिसकी कल्पना नहीं थी। इस खुलासे ने देश के मीडिया जगत की पोल खोल कर रख दी है। कोबरा पोस्ट ने मीडिया जगत के उस स्याह पक्ष का पर्दाफाश किया है जहां कहा जाता है कि पैसों के लिए देश का मीडिया अपनी आवाज और कलम का सौदा करके पत्रकारिता की निष्पक्षता से भी समझौता कर लेता है।

खुफिया कैमरे की सहायता से किए गए ‘ऑपरेशन 136’ में देश के कई नामचीन मीडिया संस्थान सत्ताधारी दल के लिए चुनावी हवा तैयार करने के लिए राजी होते नजर आए हैं। साथ ही, विपक्ष और विपक्षी दलों के बड़े नेताओं का दुष्प्रचार करके चरित्र हनन करने और उनके खिलाफ झूठी अफवाहें फैलाकर उनकी छवि को धूमिल करके सत्तारूढ़ दल के पक्ष में माहौल बनाने की सौदेबाजी का भी खुलासा हुआ है। यहां तक की सत्ताधारी पार्टी के लिए इन लोगों ने पत्रकारिता की प्रतिष्ठा को दांव पर रखते हुए नागरिक स्वतंत्रता और अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ने वालों के खिलाफ खबरें बनाने पर भी अपनी रजामंदी जाहिर की।

देशभर में आंदोलन करने वाले किसानों को माओवादियों द्वारा उकसाए हुए बताकर सरकार की नीतियों का महिमामंडन करने के लिए भी ये सहमत हो गए। तो वहीं, न्यायपालिका के फैसलों पर प्रश्नचिन्ह लगाकर लोगों के सामने पेश करने में भी इनको कोई गुरेज़ नहीं था। इस जांच में पाया गया है कि किस तरह भारतीय मीडिया अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़कर प्रेस की आजादी का गलत इस्तेमाल कर रही है और अवांछित सामग्री चलाकर पत्रकारिता के पेशे पर सवालिया निशान लगा रही है।

कोबरा पोस्ट के लिए पूरी तहकीकात पत्रकार पुष्प शर्मा ने श्रीमद् भगवत् गीता प्रचार समिति, उज्जैन का प्रचारक बनकर और खुद का नाम आचार्य छत्रपाल अटल बताकर की। इस दौरान देश के करीब तीन दर्जन बड़े मीडिया संस्थानों के वरिष्ठ और जिम्मेदार अधिकारियों से उन्होंने मुलाकात की और एक खास तरह का मीडिया कैंपेन चलवाने के लिए 6 से 50 करोड़ रुपये तक का अपना बजट बताया। कोबरा पोस्ट ने ऑपरेशन 136 का अभी पहला भाग जारी किया है जिसमें कुल 16 मीडिया संस्थानों के नाम सामने आए हैं। जिनमें अमर उजाला, पंजाब केसरी, दैनिक जागरण, इंडिया टीवी, सब नेटवर्क, डीएनए (डेली न्यूज एंड एनालिसिस) और यूएनआई जैसे बड़े नाम शामिल हैं.

इनके अलावा स्कूप व्हूप, रेडिफ डॉट कॉम, 9एक्स टशन, समाचार प्लस, एचएनएन लाइव 24×7, स्वतंत्र भारत, इंडिया वॉच, आज हिंदी डेली, साधना प्राइम न्यूज को भी सौदेबाजी में लिप्त पाया गया है. इन सभी मीडिया संस्थानों से जुड़े बड़े पदों पर काबिज लोगों की बातचीत के अंश खुफिया ऑपरेशन में दिखाए गए हैं। जिस एजेंडे को लेकर कोबरा पोस्ट ने मीडिया संस्थानों से संपर्क साधा था, उनमें चार बिंदु शामिल थे। पहला, मीडिया अभियान के शुरुआती और पहले चरण में हिंदुत्व का प्रचार करेगा, जिसके तहत धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से हिंदुत्व को बढ़ावा दिया जाएगा।

दूसरा, इसके बाद विनय कटियार, उमा भारती, मोहन भागवत और दूसरे हिंदुवादी नेताओं के भाषणों को बढ़ावा देकर सांप्रदायिक तौर पर मतदाताओं को जुटाने के लिए अभियान खड़ा किया जाएगा। तीसरा, जैसे ही चुनाव नज़दीक आ जाएंगे, राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को टारगेट किया जाएगा। राहुल गांधी, मायावती और अखिलेश यादव जैसे विपक्षी दलों के बड़े नेताओं को पप्पू, बुआ और बबुआ कहकर जनता के सामने पेश किया जाएगा, ताकि चुनाव के दौरान जनता उन्हें गंभीरता से न ले और मतदाताओं का रुख अपने पक्ष मे किया जा सके। चौथा, मीडिया संस्थानों को यह अभियान उनके पास उपलब्ध सभी प्लेटफॉर्म पर जैसे- प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, रेडियो, डिजिटल, ई-न्यूज पोर्टल, वेबसाइट के साथ-साथ सोशल मीडिया जैसे- फेसबुक और ट्विटर पर भी चलाना होगा।

कोबरा पोस्ट के अनुसार, इस एजेंडे पर उसने जिन मीडिया संस्थानों से संपर्क साधा, लगभग सभी ने यह अभियान चलाने पर सहमति दिखाई। सभी हिंदुत्व को अध्यात्मवाद और धार्मिक प्रवचन की तरह बढ़ावा देने के लिए सहमत हुए। सांप्रदायिक पृष्ठभूमि के आधार पर मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने के लिए एक खास विज्ञापन सामग्री प्रकाशित करने पर सहमत हुए। अपने मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए सत्तारूढ़ दल के लिए उसके राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को बदनाम करने और उनकी छवि खराब करने पर भी उन्होंने सहमति जताई। वहीं, कई मीडिया संस्थान सौदेबाजी के बदले नकदी भुगतान यानी कि काला धन भी स्वीकार करने के लिए तैयार थे। कुछ संस्थानों के मालिक और कर्मचारियों ने बताया कि वे स्वयं संघ से जुड़े रहे हैं और हिंदुत्ववादी विचारधारा से प्रभावित हैं लिहाजा उन्हें इस अभियान पर काम करने में खुशी होगी।

तो कुछ ऐसे भी संस्थान थे जो अपने प्रकाशनों में सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में कहानियां और खबरें लगाने के लिए सहमत हुए। कुछ ऐसे भी पाए गए जिन्होंने अपने संस्थान के अलावा अन्य पत्रकारों की मदद से दूसरे संस्थानों में भी सत्तारूढ़ दल का समर्थन करने वाली सामग्री चलवाने के लिए पूरा मीडिया प्रबंधन करने की पेशकश की। कुछ ने तो केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, मनोज सिन्हा, जयंत सिन्हा, मेनका गांधी और उनके पुत्र वरुण गांधी के खिलाफ खबरें चलाने पर भी सहमति दी। यहां तक कि ये संस्थान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार मे भाजपा के सहयोगी दलों बड़े नेताओं जैसे अनुप्रिया पटेल, ओमप्रकाश राजभर और उपेन्द्र कुशवाह के खिलाफ भी खबरें चलाने के लिए तैयार थे। वहीं, कुछ मीडिया संस्थान प्रशांत भूषण, दुष्यंत दवे, कामिनी जयसवाल और इंदिरा जय सिंह जैसे कानूनी जानकार और नागरिक समाज के बीच जाने-माने चेहरों को बदनाम करने पर भी सहमत दिखे।

साथ ही, कुछ संस्थानों ने आंदोलन करने वाले किसानों को माओवादियो के तौर पर प्रस्तुत करने के लिए भी सहमति जताई।मीडिया संस्थान राहुल गांधी जैसे नेताओं की ‘चरित्र हत्या’ करने के लिए खास सामग्री तैयार करने और उसे बढ़ावा देने को भी राजी हो गए। कोबरा पोस्ट ने कहा है कि स्टिंग ऑपरेशन में उसके पत्रकार को उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर का भी सहयोग मिला। राजभर की सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी ने पुष्प शर्मा को स्टिंग के दौरान पार्टी की मध्य प्रदेश इकाई का प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी के तौर पर पेश होने में मदद की। गौरतलब है कि ऑपरेशन 136 के दौरान पत्रकार ने खुद को सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी की मध्य प्रदेश इकाई का भी अध्यक्ष बताया था।

इस पूरी तहकीकात को ऑपरेशन 136 नाम इसलिए दिया गया क्योंकि वर्ष 2017 के प्रेस इंडेक्स में भारत विश्व में 136वें पायदान पर है।

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