हर माता-पिता को जान लेनी चाहिए की आखिर क्यों छोटे बच्चे मिट्टी खाते हैं

आपने नियमित रूप से छोटे बच्चों को दीवार पर बने चाक, मिट्टी या पेट के स्क्रैप खाते हुए देखा होगा। युवकों की उन हरकतों से रिश्तेदारों का घेरा परेशान हो जाता है। बार-बार मना करने के बाद भी बच्चे इस आदत को नहीं छोड़ पा रहे हैं। हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से आज बताएंगे कि युवा मिट्टी या चाक का सेवन क्यों करते हैं? बच्चों में उन व्यवहारों के उद्देश्य को जानकर आपको काफी ज़्यादा आश्चर्य होगा।

मिट्टी निगलने की यह समस्या हमेशा युवाओं में ही नहीं बल्कि वयस्कों में भी देखी जाती है। हालाँकि, यह समस्या एक से सात वर्ष की आयु के बच्चों में अधिक आम है। आपको बता दें कि पोषक तत्वों की सकारात्मक शैलियों की कमी के कारण, जिसमें आयरन, जिंक आदि शामिल हैं, बच्चों में मिट्टी जैसी अजीबोगरीब चीजों के सेवन का विकल्प पैदा होता है।

युवा युवाओं में मिट्टी का अंतर्ग्रहण एनीमिया का संकेत है। इसका कारण बच्चों के खाने में केवल दूध की उपस्थिति भी हो सकती है। सिर्फ खाने में दूध देने से बच्चे के अंदर खून की कमी हो जाती है। बच्चो के खाने में अनाज, दालें, सब्जियों की कमी के कारण भी यह परेशानी पैदा हो रही है।

और साथ ही दोस्तों, मिट्टी खाने वाले बच्चों के पीछे का कारण एक बीमारी है जिसे पीका ईटिंग सेवन कहा जाता है। पिका पक्षियों की एक अनोखी प्रजाति है, जो कुछ भी खाने के लिए प्रसिद्ध है। बच्चों में पिका के कारणों में से एक कुपोषण को भी माना जा सकता है।

कुछ बच्चों में मिट्टी खाने की निर्भरता ऑटिज्म नामक बीमारी के कारण भी होती है। इस बीमारी में बच्चे का बौद्धिक विकास ठीक से नहीं हो पाता है। हालांकि हर बार बच्चे जिज्ञासा के कारण ऐसा करते हैं। आसपास के वातावरण को पकड़ने के लिए हर चीज को मुंह से लगाकर परखने की कोशिश करते हैं, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ यह आदत दूर हो जाती है।

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