हार्दिक को फेल करने के लिए शिवराज ने किया पटेल से प्रेम

अखिलेश अखिल

लखनऊ ट्रिब्यून दिल्ली ब्यूरोl गुजरात चुनाव में पटेलों की पैतरेबाजी से हलकान हुयी बीजेपी को क्या क्या पापड बेलने पड़े थे इसकी जानकारी मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कुछ ज्यादा है। इधर जब राजस्थान उपचुनाव में बीजेपी की तीनो पर हुयी हार शिवराज चौहान को और भी डरा दिया है। शिवराज चौहान वैसे भी कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं। केंद्र भी शिवराज से कुछ ज्यादा खुश नहीं है। कारण है मध्यप्रदेश में जनता का विद्रोह। सूबे के लोग अब कहने लगे हैं कि मामा ने कुछ भी नहीं किया। आपको बता दें कि शिवराज सिंह चौहान को सूबे के लोग मामा के नाम से ही पुकारते हैं।

यह नाम अपनापन देता है। जनता भी खुश और मामा भी खुश। उधर प्रदेश के कई बीजेपी नेता भी शिवराज से खुश नहीं है। ऐसे में शिवराज को अगला चुनाव जितना मुश्किल से भरा हुआ है। यही वजह है कि शिवराज सिंह अब जातीय गणित के जरिये तीन विधायकों को मंत्री मनाया है। ताकि चुनाव में जातीय खेल पर कोई असर नहीं पड़े। शिवराज की नजर खास तौर पर पटेल समाज पर है। पटेल की नाराजगी वे गुजरात में देख चुके हैं इसलिए नए मंत्रिमंडल विस्तार में उन्होंने एक पटेल विधायक को ना चाहते हुए भी मंत्री बनाया है।

जातिगत समीकरण साधते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीन नए मंत्री जोड़े हैं जिनमें उनके विरोधी माने जाने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल के भाई जालम सिंह भी शामिल हैं। साथ ही हार्दिक पटेल के एमपी में चुनावी गतिविधियां शुरू करने के पहले ही शिवराज ने एक पाटीदार विधायक को मंत्री बना दिया है। नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं, लिहाज़ा नारायण सिंह कुशवाहा, जालम सिंह पटेल और बालकृष्ण पाटीदार सिर्फ नौ महीने के लिये मंत्री बने हैं।

आपको बता दें कि आठ महीने पहले पाटीदार बाहुल्य मंदसौर ज़िले में हुये किसान आंदोलन में पुलिस फायरिंग में छह लोगों की मौत हुई थी। पाटीदार समाज की नाराज़गी दूर करने के लिए मुख्यमंत्री ने बालकृष्ण पाटीदार को मंत्री बनाया है। दरअसल, भाजपा के गढ़ मालवा में पाटीदारों की आबादी करीब ढाई से तीन लाख हैं। राज्य में उनकी कुल आबादी करीब 60 लाख हैं। गुजरात में पाटीदारों की नाराजगी का असर चुनाव नतीजों में देखने को मिला था साथ ही किसान आंदोलन में फायरिंग और हिंसा के बाद हार्दिक पटेल सूबे मालवा अंचल में खासी सक्रिय नजर आए थे।

ऐसे में हार्दिक के नए तेवर के साथ इन इलाकों में आक्रमक होने के पहले ही शिवराज ने उन्हें ‘फेल’ करने के लिए बड़ा सियासी दांव खेल दिया है। हालांकि, बालकृष्ण पाटीदार खुलकर इस बात से इत्तफाक नहीं रखते हैं। वो सधे हुए अंदाज में कहते हैं कि ” इसको देर थोड़ी ना कहते हैं। समय-समय होता है। समय अपनी गति से चलता है। हम विधायक के रूप में काम कर रहे थे। पार्टी के लिए कर रहे थे। अब नया दायित्व आया है। ”

शिवराज सिंह को पता है कि हार्दिक पटेल के आने से पटेलों की राजनीति उनके हाथ से जा सकती है। मंदसौर की हिंसा आज भी पटेलों को याद है और हार्दिक उस मामले को चुनाव में उठाकर शिवराज सरकार को घेरने से बाज नहीं आएगी। अब देखना होगा कि शिवराज का यह पटेल प्रेम हार्दिक की राजनीति को कितना फेल कर पाएगी।

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