हिजाब विवाद कोई विवाद नहीं, बल्कि भारत के खिलाफ साजिश : भाजपा

नई दिल्ली: कर्नाटक उच्च न्यायालय में विधानसभा चुनाव खत्म होने तक ‘हिजाब’ विवाद पर सुनवाई टालने की याचिका का हवाला देते हुए भाजपा ने विवाद के समय पर सवाल उठाया और कहा कि यह विवाद एक विवाद नहीं है, बल्कि भारत के खिलाफ एक साजिश है। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म होने तक हिजाब विवाद पर सुनवाई टालने के लिए उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है। अदालत ने कहा कि आवेदन सूचीबद्ध नहीं है और हम इस पर विचार कर सकते हैं कि क्या यह अनुरोध चुनाव आयोग या चुनाव कराने वाले प्राधिकरण द्वारा किया गया था।

याचिका की ओर इशारा करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सी.टी. रवि ने कहा, “हिजाब विवाद में, याचिकाकर्ता छात्रों ने पांच राज्यों में चुनाव संपन्न होने तक अपने मामले को स्थगित करने के लिए उच्च न्यायालय के समक्ष एक आवेदन दायर किया है। छात्रों को विधानसभा चुनावों से क्या लेना-देना है? क्या अब भी कोई यह मानता है कि हिजाब मुद्दा पूर्व नियोजित नहीं था?”

उन्होंने कहा, “हिजाब विवाद कोई विवाद नहीं है, यह भारत के खिलाफ साजिश है।” कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सोमवार को हिजाब विवाद के संबंध में दायर याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई स्थगित कर दी। पिछले हफ्ते, उच्च न्यायालय ने अगले आदेश तक छात्रों को हिजाब या कोई अन्य धार्मिक पोशाक पहनने से रोक दिया था।

मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा है कि हिजाब विवाद पर कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश का सभी को पालन करना चाहिए। बोम्मई ने सोमवार को कहा था, “10वीं कक्षा तक के स्कूल आज (सोमवार) फिर से खुल गए हैं। विभिन्न जिलों से कुछ घटनाओं की सूचना मिली है। मानक संचालन प्रक्रियाओं पर चर्चा के लिए एक बैठक बुलाई जाएगी। स्कूल प्रबंधन, प्रिंसिपल और माता-पिता उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने की जिम्मेदारी साझा करते हैं। यह उच्च न्यायालय के लिए अपना अंतिम फैसला देने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करेगा। हमें तब तक संयम बनाए रखना चाहिए।”

हिजाब विवाद, जो पिछले महीने उडुपी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में छह छात्राओं द्वारा हिजाब हटाने से इनकार करने और कक्षा में प्रवेश करने से मना करने के बाद शुरू हुआ था। यह विवाद राज्य में एक प्रमुख मुद्दा बन गया है और इसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। पीठ ने मीडिया से कहा था कि वह इस मामले पर अंतिम आदेश जारी होने तक वकील द्वारा पारित टिप्पणी और तर्को को प्रकाशित न करें।

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