हे जनता जनार्दन! खुद गरीबी की चादर ओढ़े अमीरों का जयकारा लगाते रहें

अखिलेश अखिल

लखनऊ ट्रिब्यून दिल्ली ब्यूरो: ऑक्सफेम की ताजा रिपोर्ट बहुत कुछ कह रही है। रिपोर्ट का सार यही है कि बढ़ती पूंजीवादी नीतियों की वजह से भारत में असामनता यानि अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ़ती जा रही है। हाल ही के सालों में जिस तेज़ी से अमीरों की संपत्ति बढ़ी है और गरीबों की घटी है वो मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाती है। भारत में असमानता बीते तीन दशकों से बढ़ रही है। हालत यह है कि देश के कुल जीडीपी का 15 प्रतिशत हिस्सा भारतीय अरबपतियों के खाते में है।

वर्ष 2017 में देश में 101 अरबपति के पास 65 अरब की संपत्ति आंकी गयी है। इस रिपोर्ट से साफ़ पता चलता है कि सरकार की आर्थिक नीतियां देश की आम जनता के खिलाफ है। कहने के लिए सरकार आम लोगों के लिए बहुत कुछ करती दिख रही है लेकिन उसका लाभ आम जनता को मिलने की बजाय समाज के चंद सफेदपोशों या दलालों के पास पहुँच रहा है। नेता अधिकारी दलाल और पूंजीपति आपस में मिलकर सरकारी फंड को लुटते रहे हैं और आम जनता जहालत की जिंदगी ही जीती रही है।

रिपोर्ट में अमीरी-गरीबी के बीच बढ़ती खाई के लिए सरकारों की असंतुलित नीतियों को ज़िम्मेदार बताया गया है। गौरतलब है कि सरकार गरीबों के लिए काम करने के दावे तो करती है लेकिन इसके बावजूद अमीरों की संपत्ति बढ़ रही है। गरीब के लिए देश में व्यवसाय से लेकर रोज़गार तक की तंगी है। इसमें कहा गया है कि भारत में अमीरों ने देश में सृजित संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा क्रोनिकैपिटलिज्म में हासिल किया है। वहीं नीचे के तबके का आय में हिस्सा लगातार कम होता जा रहा है। ऐसा कोई पाहि बार नहीं है। जब से उदारीकरण की नीति अपनाकर सरकार काम कर रही है तभी से अमीर और गरीब के बीच गहरी खाई होती जा रही है।

ऑक्सफेम इंडिया के मुताबिक, ये असमानताएं 1991 के बहुप्रचारित उदारीकरण के दौरान अपनाए गए सुधार पैकेजों तथा उसके बाद अपनाई गई नीतियों का परिणाम हैं।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि ताज़ा अनुमानों के अनुसार भारतीय अरबपतियों की कुल संपत्ति देश की जीडीपी के 15 प्रतिशत के बराबर है। यह केवल पांच साल पहले ही जीडीपी के 10 प्रतिशत के बराबर थी। मतलब पिछले पांच सालों में अमीरों की संपत्ति बहुत तेज़ी से बढ़ी है।

इस रिपोर्ट के आने के बाद अब बहस इस बात को लेकर हो सकती है कि भारत जैसे देश में उदारीकरण की नीति जायज है या नहीं ? चुकी जब उदारीकरण की चाहत रखने वाला देश अमेरिका ही अब अमेरिका फर्स्ट की नीतियों को अपना रहा है तो फिर भारत सरकार की ऐसी क्या मज़बूरी है कि वह इस देश को विषमता की खाई में धकेले।

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