हे जेटली जी ! इकोनॉमी में फिर से 17 लाख 78 हजार करोड़ नगदी का चलन, फिर नोटबंदी क्यों

अखिलेश अखिल

बड़ी अजीब बात है। एक साल चार माह पहले नोटबंदी करते समय सरकार ने कहा था कि अब देश से गंदगी का सफाया हो जाएगा। कालधन ख़त्म होगा ,रिश्वतखोरी समाप्त होगी ,टेरर फंडिंग समाप्त होगी और इकॉनमी सफ़ेद हो जाएगा। बाद में सरकार ने यह भी कहा था कि नोटबंदी के बाद डिजिटल लेन देन बढ़ेगा और टैक्स में बढ़ोतरी होगी और सबकुछ सरकार की नजरों में होगा। सरकार के इस प्रहार से देश परेशान हो गया। कई की मौत हुयी ,कइयों के शादी विवाह रुक गए। बेकारी की तो बात ही मत पूछिए।

लाखों की संख्या में बेरोजगार लोग गाव चले गए। बेकारी की मार से आज भी देश बेहाल और परेशान है। लेकिन इधर जो खबर आ रही है वह चौकाने वाली है। आरबीआई से आ रही खबर है कि 16 फरवरी 2018 तक बाज़ार में 17 लाख 78 हज़ार करोड़ रुपये की नकदी फिर से चलन में आ गई है। ये नोटबंदी से पहले चलन में नकदी का 98.94% हिस्सा है। नोटबंदी से पहले बाज़ार में 17 लाख 97 हज़ार करोड़ रुपये की नकदी चलन में थी। सरकार ने नोटबंदी कर 86% नकदी को बंद कर दिया था। लेकिन एक साल चार महीने में ही फिर से बाज़ार में उतनी ही नकदी चलन में आ गई है।

इसका क्या मतलब है यह समझ से परे है। तो क्या माना जाय अभी देश में लोग डिजिटल भुगतान नहीं कर रहे हैं। और अगर कर रहे हैं तो इतनी बड़ी मात्रा में नगदी कैसे आ गयी ?जितनी नगदी अभी अर्थ्व्यवस था में तैर रही है उससे साफ़ हो गया है कि नोटबंदी करने के पीछे मोदी सरकार ने जो भी उद्देश्य बताए थे उसमें से कोई भी पूरे होता नज़र नहीं आ रहा है। आरबीआई के हालिया आकड़ों मुताबिक, देश में फिर से लगभग उतनी ही नकदी चलन में आ गई है जितनी नोटबंदी के पहले थी।

बहुत से विशेषज्ञों का कहना है कि इस से पता चलता है कि सरकार ने नोटबंदी जैसे बड़े कदम को उठाने के पहले सही से सोचा समझा नहीं था। बिना किसी मज़बूत नीति के ये कदम उठा लिया गया था। जिसका खामियाज़ा जनता ने अपने रोज़गार से लेकर जान तक गवाने में किया। एक और जानकारी और मिल रही है कि आरबीआई आज भी नोटबंदी के दौर की नकदी गिनती जा रही है। यह गिनती कब तक चलती रहेगी ,कहना मुश्किल है। और कालाधन कहाँ गया इसकी कोई जानकारी नहीं मिल रही है। इस बीच बैंक में हो रहे घोटाले से देश दंग है।

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